बीहड़ में वन गाय और नील गाय की दहशत से परेशान किसान
बीहड़ों में इस कड़कड़ाती सर्दी में किसान जान हथेली में लेकर खेतों की रखवाली के साथ रतजगा करने को मजबूर है। इसका कारण डकैत नहीं बल्कि जंगली जानवर हैं।
औरैया में डकैतो के भय के बाद इस समय बीहड़ के किसान वन गाय, जंगली सुअर और नीलगाय की दहशत से परेशान है। हालत यह है कि वहीं जंगली सुअर आलू की फसल को नष्ट कर रहे है। बीते दिन एक किसान की सर्दी से मौत हो चुकी है। बीहड़ क्षेत्र के गांव अयाना,बीजलपुर,फरहा,भरसौल, सिखरना पाकर, गुंठी का पुर्वा, तिवरलालपुर, नवादा ज्वाला प्रसाद समेत एक सैकड़ा गांव के किसान इन आवारा जानवरों की दहशत में परेशान है। बीहड़ क्षेत्र में तकरीबन आठ से दस हजार नील गाय है और चार हजार के करीब वन गाय है। जबकि जंगली सुअरों की संख्या भी हजारों में है। नीलगाय और वन गाय फसलों को नष्ट करने में लगी है। वहीं बीहड़ के आलू किसान भी संकट में है। सुअरों का झुंड अचानक आलू की फसल पर हमला करता है और पूरी फसल को खेद डालता है। यही नही अकेले किसान पर जंगली सुअर हमला भी बोल देता है। फसल के बचाने की चिंता किसानों को खाए जा रही है। किसान ऐसी सर्दी में रात रात भर खेतों में रहकर रतजगा करने को मजबूर है। जिससे कि उनकी जान आफत में बनी हुई है। इन गांव के किसान सतनाम सिंह, वीर भान, हरपाल सिंह तथा सोनेलाल ने बताया कि वह लोग ऐसी सर्दी में फूस की मढ़ैया बनाकर सर्दी की रात जगकर काटते है। यहीं नही दिन में भी इन जानवरों का संकट रहता है। तो घर के लोग दिन व रात में करके ड्यूटी करते है और खेतों की रखवाली कर रहे है। जबकि बीते दिसम्बर को बीजलपुर निवासी रामऔतार(65) बीती रात अपनी फसल में पानी लगाकर खेत पर ही रखवाली करने के लिए रुके थे। सर्दी के कारण उनकी रात में ही मौत हो गई थी। इन आवारा जानवरों की दहशत से किसानों की जान आफत में है। कई किसान उधार लेकर कटीले तार भी लगा रहे है।