संस्कृति मंत्रालय और बीएचयू वैदिक विज्ञान केंद्र की ओर से रविवार को मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र सभागार में काशी और भगवान विश्वनाथ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि पर्यटन मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि इस समय देश ही नहीं पूरा विश्व उत्साह मना रहा है। काशी सबसे प्राचीन आध्यात्मिक नगरी है, जहां सभी देव-देवी विराजमान हैं। यहां के कण कण रुद्र का स्वरूप है। यही कारण है कि विदेशी आक्रांताओं ने यहां कि सांस्कृतिक, आध्यात्मिक परंपरा को तहस-नहस करने का प्रयास किया, जिसका काशीवासियों ने प्रबल विरोध कर संस्कृति को संरक्षित रखा।
विषय प्रवर्तन करते हुए प्रो. उपेंद्र त्रिपाठी ने काशी को मोक्ष एवं ज्ञान की नगरी बताया। विशिष्ट अतिथि प्रो. हृदय रंजन शर्मा ने काशी को ज्ञान की पूर्णता प्रदान करने वाली नगरी बताया। प्रो. कमलेश झा, बीएचयू के कार्यवाहक कुलपति प्रो. वीके शुक्ल ने भी विचार रखे। दो शैक्षणिक सत्रों में 18 विद्वानें ने प्रतिभाग किया। संगोष्ठी में प्रो. आलोक त्रिपाठी, प्रो. सुमन जैन, डॉ. सुभाष चन्द्र यादव, प्रो. श्याम गंगाधर बापट, प्रो. कौशलेंद्र पांडेय, डॉ. प्रभाकर उपाध्याय, डॉ. विनोद जायसवाल, प्रो. माधव जनार्दन रटाटे, प्रो. शीतला प्रसाद शुक्ल, प्रो. संतोष कुमार शुक्ल, प्रो. गिरिजा शंकर शास्त्री आदि मौजूद रहे।