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वरुणा के डूब क्षेत्र का बढ़ा दायरा

Tue, 03 May 2016 01:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर को सरकारी विभाग ही पलीता लगा रहे हैं। पहले की गई पैमाइश में राजस्व, सिंचाई विभाग और नगर निगम ने वरुणा नदी को महज 25 मीटर के दायरे में समेट दिया था। साथ ही अतिक्रमण के नाम पर महज छह लोगों को नोटिस थमा कर पल्ला झाड़ लिया था। अब वहीं दोबारा हो रहे सर्वे में 300 से अधिक भवन चिह्नित किए गए हैं। ये सभी डूब क्षेत्र या ग्रीन बेल्ट के दायरे में अवैध ढंग से बनाए गए हैं। इस सीमांकन से अवैध कब्जेदारों में हड़कंप मच गया है।
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पैमाइश का काम अभी चल रहा है। अधिकारियों की मानें तो अवैध कब्जेदारों की सूची और भी लंबी हो सकती है। ग्रीन बेल्ट में अवैध रूप से काबिज लोगों को कई रसूखदार भी शामिल हैं। इतना ही नहीं कई होटल, व्यवसायिक भवन और बहुमंजिली इमारतें भी दोबार पैमाइश में चिह्नित हैं। इन्हें भी नोटिस जारी किया जा रहा है। जहां स्थानीय प्रशासन पर सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द शक्ल देने का दबाव है, वहीं अवैध कब्जेदारों पर कार्रवाई को लेकर भी प्रशासन फिलहाल पेशोपेश में ही दिख रहा है।


हालांकि कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण का रवैया इसे लेकर तल्ख है। कमिश्नर के निर्देश के बाद वीडीए, राजस्व विभाग और सिंचाई विभाग मिलकर पिछले तीन दिनों से दोबारा सीमांकन और सर्वे का काम करा रहे हैं। दोबारा शुरू हुए सीमांकन में सैकड़ों मकान नदी के डूब क्षेत्र में सामने आए हैं। कमिश्नर इस बात से खफा हैं कि वरुणा किनारे धड़ल्ले से अवैध निर्माण होते गए और जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग की अनदेखी का नतीजा है कि नदी के पेटे तक कब्जा होता गया और नगर निगम मकान नंबर जारी करता गया। अधिकारियों और भवन स्वामियों की मिलीभगत का नतीजा है कि जिस नदी के किनारों को हरा-भरा होना चाहिए, वहां कंक्रीट का जंगल आबाद हो गया है।
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