लगातार बढ़ रही गरमी ने अप्रैल के दूसरे पखवारे के पहले दिन शनिवार को पिछले चार वर्ष का रिकार्ड तोड़ दिया है। शनिवार को अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचा तो सभी लोग बेहाल हो गए। सूरज के दहकने से जहां बच्चे-महिलाएं पसीने-पसीने हो गए, वहीं घोसलों में चिड़ियों की छांव भी तड़प उठी। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में कोई सिस्टम न बनने से नम हवाएं ठहर गई हैं। ऐसे हालत में गरमी आम लोगों से लेकर गरीबों और मजदूरों पर भारी पड़ सकती है।
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इस बार काशी समेत पूर्वांचल में छक्के छुड़ा देने वाली तपन पड़ने के लक्षण दिखने लगे हैं। पश्चिमी विक्षोभ का सक्रिय न हो पाना इसका प्रमुख कारण है। चालू सीजन में बंगाल की खाड़ी में अब तक कोई लो प्रेशर एरिया यानी हवा के कम दबाव का क्षेत्र नहीं बन पाया है। इस वजह से हवाएं बंगाल की खाड़ी से नहीं चल रही हैं। अभी तक कोई बड़ी आंधी, चक्रवात न आने की वजह से भी लोकल हीटिंग लगातार हो रही है।