वाराणसी। बभनियांव में चल रही खोदाई में जो प्राचीन शिवमंदिर के प्रमाण मिले थे, उसके उत्तरी छोर पर मंगलवार को मंदिर का भव्य स्वरूप भी दिखाई दिया। साथ ही उत्तरी छोर के बाहरी दीवार की जो ईटें करीब 500 साल पहले निकाली गई थीं, उसके निचले हिस्से की जानकारी भी मिली।
बीएचयू प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष प्रो. ओएन सिंह और सह निदेशक प्रो. अशोक सिंह ने बताया कि महाशिवरात्रि के पर्व पर शिवमंदिर में विधि विधान से भोलेनाथ की पूजा की गई। इसके बाद बाबा का आशीर्वाद लेकर उत्खनन का काम शुरू हुआ। सोमवार को हुए खोदाई कार्य में बड़ी मात्रा में करीब 500 साल पहले मंदिर के बाहरी दीवार से ईटें निकालने का प्रमाण मिला था। प्रो. अशोक सिंह ने बताया कि इसके नीचे खोदाई जब कराई गई तो उत्तरी वाह्य दीवार की भी जानकारी मिली। इससे मंदिर का गर्भ गृह, अधिष्ठान, प्रदक्षिणा पथ, वाह्य दीवाल का भव्य स्वरूप सामने आया। अब मंदिर के प्रवेश द्वार और गर्भ गृह के अंदर खोदाई कराकर विस्तृत स्वरूप का पता लगाया जाएगा।