हज यात्रा के लिए अपनों से विदा लेते जाइरीन।
हज पर जाने की खुशी तो अपनों से बिछड़ने का गम। गुरुवार को सांस्कृतिक संकुल स्थित अस्थायी हज हाउस में मौजूद हर शख्स के चेहरे पर यही अक्स नजर आ रहा था। जो हज पर जा रहे थे और जो उन्हें विदा करने आए थे, वो इन दोनों एहसास एक साथ महसूस कर रहे थे। फूलमालाओं और इत्र की खुशबू से पूरा सांस्कृतिक संकुल गमक रहा था। सलामती की दुआ और नारा-ए-तकबीर के साथ पहली बस को सुबह साढ़े दस बजे एयरपोर्ट के लिए रवाना किया गया।
बस को उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन शकील अहमद बबलू, काजी-ए-शहर मौलाना गुलाम यासीन, सेंट्रल हज कमेटी के मेंटर डॉ. इफ्तेखार अहमद जावेद ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। काजी-ए-शहर ने दुआख्वानी की। हजयात्रियों को रवाना करने के लिए स्टेट हज कमेटी के परवेज अहमद जोखू, पूर्वांचल हज सेवा समिति के डॉ. अकबर अली, अदनान खां, डॉ. अमीन, मौलाना मुफ्ती हन्नान, एसएम खुर्शीद, हाजी अब्दुल समद अंसारी और अशफाक अहमद डबलू भी मौजूद रहे।
पूर्वांचल के 15 जिलों के 300 हजयात्रियों का पहला जत्थे की फ्लाइट दोपहर ढाई बजे की थी लेकिन हजयात्रियों को लेकर नाज एयरलाइंस की फ्लाइट ने दोपहर 3:45 पर मदीना के लिए उड़ान भरी। सांस्कृतिक संकुल स्थित अस्थायी हज हाउस सुबह से ही गुलजार था। पहले जत्थे में सबसे ज्यादा 78 यात्री इलाहाबाद के हैं, जबकि 43 यात्रियों के साथ वाराणसी दूसरे नंबर पर रहा। गाजीपुर (35), मऊ (29), जौनपुर (18), चंदौली (15), आजमगढ़ (12), गोरखपुर (13), संत रविदास नगर (12), कुशीनगर (12), बलिया (10), कौशांबी (9), मिर्जापुर (7), देवरिया (5) और सोनभद्र से दो यात्री पहले जत्थे में गए हैं।