सुप्रसिद्ध सितार वादक व गायक सुजात खान ने जब सितार पर ये इनायतें गजब की ये बला की मेहरबानी... को सितार के तारों पर झंकृत किया तो पूरा माहौल संगीत की स्वरलहरियों से सराबोर हो उठा। उस्ताद विलायत खां की स्मृति में रविवार की शाम को कैंटोंमेंट स्थित होटल में दरबारी महफिल सजाई गई। संगीत परिषद काशी, स्वरांगना ललित कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगीत संध्या में सितार पर संगीत की महफिल सजी।
रविवार को उस्ताद सुजात खान ने सितार वादन की शुरुआत की। उन्होंने फिर ख्यालों में कोई आ गया..., जिंदगी से बड़ी सजा ही नहीं..., तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे..., मैं तो पिया से नैना..., हजारों ख्वाहिशें ऐसी के हर ख्वाहिश पर दम निकले..., कहां आ के रुकने थे रास्ते..., खामोश लब हैं झुकी पलकें... और नैना लगा के मैं पछताई... की प्रस्तुतियां दीं। तबले पर दुर्जय भौमिक एवं उस्ताद शारिक मुस्तफा ने संगत की।
दरबारी महफिल का शुभारंभ उस्ताद सुजात खान, संगीत परिषद के अध्यक्ष विनय कुमार जैन और स्वरांगना ललित कला केंद्र के सचिव सुरेंद्र मिश्रा शीलू ने दीप जलाकर किया। कार्यक्रम का संचालन प्रतिमा सिन्हा ने किया। इस दौरान हेमांग अग्रवाल, तन्मय जैन, अशोक जी अग्रवाल, मकुंद लाल टंडन, प्रफुल्ल चंद्र राय, राजेश कुमार गुप्ता, प्रदीप कुमार डे, राजीव जयपुरिया, आनंद प्रकाश अग्रवाल, कर्नल संदीप शर्मा, सुबोध अग्रवाल, अरविंद शुक्ला, श्याम कृष्ण अग्रवाल, विनोद अग्निहोत्री, डॉ. निर्मल जैन मौजूद रहे।