बीएचयू के पत्रकारिता विभाग में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी मे वक्ताओं ने सोशल मीडिया के दौर पर पत्रकारिता विषय पर अपनी बात रखी। समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि तमिलनाडु से आए कोविलुर स्वामी ने कहा कि प्राचीन ज्ञान परंपरा और पाण्डुलिपियों का डिजिटलीकरण जरूरी है। सोशल मीडिया के दौर में पत्रकारिता और जनसंचार के बदलते रुझान विषय पर आयोजित संगोष्ठी में मीडिया, तकनीक, नैतिकता, एल्गोरिदम और व्यावसायिक दबावों पर चर्चा हुई।
संत कोविलूर स्वामी ने कहा कि आज मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हावी है, जो सूचना तो देता है लेकिन इसे शुद्ध पत्रकारिता नहीं माना जा सकता। उन्होंने चेताया कि गलत सूचनाओं से घिरा समाज भविष्य में मीडिया युद्ध का साक्षी बन सकता है। शिक्षाविद कुलपति प्रो. केवी नागराज ने कहा कि मीडिया और सत्ता के बीच हमेशा से शक्ति-संबंध रहा है। यदि तकनीक का सावधानीपूर्वक उपयोग नहीं किया गया तो यह सामाजिक असंतुलन पैदा कर सकती है। मुख्य वक्ता प्रो. सुरभि दहिया (मीडिया बिजनेस स्टडीज, आईआईएमसी) ने कहा कि वर्तमान दौर में मैनेजमेंट और पत्रकारिता के बीच गहरा तालमेल अनिवार्य हो गया है। विशिष्ट अतिथि काशी विश्वनाथ धाम के सीईओ विश्वभूषण मिश्र ने पत्रकारिता के आदर्शों पर चर्चा करते हुए कहा कि हनुमान जी भगवान राम के कार्यों को एक कुशल पत्रकार की तरह संपादित और संप्रेषित करते थे। एक पत्रकार को आत्म-मूल्यांकन के साथ कार्य करना चाहिए और आज की पत्रकारिता को सत्य, यश और आजीविका-तीनों के बीच संतुलन बनाना होगा। प्रोफेसर ओपी सिंह ने कहा कि भारत विश्व का भरण-पोषण करने में सक्षम है। समापन समारोह मे शोधार्थियों को शोध प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. ज्ञान प्रकाश मिश्र ने सोशल मीडिया के सकारात्मक-नकारात्मक प्रभावों पर बोलते हुए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। संचालन और स्वागत अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के आयोजन सचिव डॉ बाला लखेंद्र ने किया।