कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर शासन, प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है लेकिन बीएचयू अस्पताल में दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक ओर बेड न मिलने से परिजन बच्चों को लेकर भटक रहे हैं। वहीं, मजबूरी में स्ट्रेचर पर नवजात बच्चों का इलाज कराना पड़ रहा है। इससे भी बड़ी समस्या यह है कि बिना चादर ही बच्चों को स्ट्रेचर पर लिटा दिया जा रहा है।
बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी का चिल्ड्रेन वार्ड पिछले एक सप्ताह से भरा पड़ा है। इसमें नवजात बच्चों के साथ ही किशोर और युवा भी हैं। यहां बेड की कमी तो बनी है, लेकिन जिसे स्ट्रेचर पर रखा गया है उनकी भी देखरेख सही से नहीं हो पा रही है। मंगलवार को बिहार के डेहरी आसनसोल निवासी विनोद मेहता दो दिन के नाती को लेकर पहले तो भटकते रहे। किसी तरह स्ट्रेचर मिला तो चादर नहीं मिला। किसी तरह घर से लाए चादर में लपेटकर बच्चे को स्ट्रेचर पर लिटाया गया। उन्होंने बताया कि रविवार को ही बच्चे का जन्म बिहार में हुआ। तबीयत बिगड़ी तो बीएचयू लेकर आए कि बेहतर इलाज हो जाएगा। यहां आने के बाद बेड नहीं मिला।
मेज ही इलाज का विकल्प
चिल्ड्रेन वार्ड में बेड का संकट लंबे समय से बना हुआ है। ऐसा नहीं है कि अधिकारियों को नहीं पता, लेकिन समस्या के दूर नहीं होने की वजह से अब मेज ही बच्चों के इलाज का विकल्प बना है। एक सप्ताह से यहां मेज पर ही बच्चों का इलाज हो रहा है। मंगलवार को भी यहां एक बच्ची भर्ती की गई। अगर जल्द ही समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो बच्चों की परेशानी बढ़ सकती है।
गलियारे में करते रहे इंतजार
दूरदराज से आए परिजन इमरजेंसी के बाहर गलियारे में स्ट्रेचर पर मरीजों को लिटाकर दिखाने का इंतजार करते रहे। इस वजह से गलियारा भी पैक हो गया था। मंगलवार दोपहर मरीजों, परिजनों की सुरक्षाकर्मियों से नोकझोंक भी हुई। सुरक्षाकर्मी लोगों को किनारे खड़े होने को कहते रहे, लेकिन मरीजों की संख्या अधिक होने की वजह से काफी दिक्कत हुई।