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असि और वरुणा से अतिक्रमण हटाना होगी चुनौती

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद जिला प्रशासन के सामने असि नदी और वरुणा से अतिक्रमण हटाना सबसे बड़ी चुनौती होगी। विशेषज्ञों की मॉनिटरिंग कमेटी ने गंगा निर्मलीकरण के लिए असि और वरुणा से अतिक्रमण हटाने की सिफारिश की है। अब देखना है कि एक्शन टेकन रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन क्या रुख अख्तियार करता है। नदी विशेषज्ञों का कहना है कि अतिक्रमण के कारण असि नदी जहां अपना अस्तित्व खो चुकी है, वहीं वरुणा भी अब सिकुड़ चुकी है। नदी के किनारे ही नहीं तलहटी में घुसकर अट्टालिकाएं बनाई गई हैं और कई कॉलोनियां बस गई हैं। इसके लिए विकास प्राधिकरण से ले आउट पास हुआ है और नक्शे भी स्वीकृत हैं। हर भवन को बिजली, पानी का कनेक्शन मिला हुआ है। वीडीए के पास इस अतिक्रमण का कोई जवाब नहीं है। असि संघर्ष समिति के गणेश शंकर चतुर्वेदी ने बताया कि एनजीटी ने असि नदी के दोनों किनारे पर हरित पट्टी बनाने के लिए नगर निगम को निर्देश दिया था बावजूद हरित क्षेत्र के लिए खाली जमीन पर अवैध निर्माण हो चुके हैं। असि के किनारे खाली जमीन संकट मोचन पुलिया एवं रविंद्रपुरी पुलिया के बीच की जमीन पर लॉकडाउन के दौरान निर्माण कार्य हुए हैं। राजस्व विभाग ने 1883 के बंदोबस्ती नक्शे का हवाला देते हुए 10 किलोमीटर लंबी नदी को नाला बताया है।
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असि में नदी के सारे गुण
असि के लिए आंदोलन से जुड़े रामयश मिश्र का कहना है बीएचयू के नदी विज्ञानियों ने असि पर रिसर्च के बाद बताया था कि गंगा की तरह ही असि में नदी के सभी गुण मौजूद हैं। नदी की पांच से दस फीट की खोदाई कराने पर भूमिगत जल का स्तर मिलेगा। शिव पुराण के अलावा गोस्वामी तुलसीदास ने भी विनय पत्रिका में इस नदी का उल्लेख किया था।
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नदी को पुनर्जीवित करने की चुनौतियां
नदियों का उद्गम स्थल हो चुका है समाप्त
तलहटी में मकानों और जमीन की कर दी गई है रजिस्ट्री
अलॉट कर दिए गए हैं मकान नंबर
जलनिकासी का प्रमुख जरिया बन चुकी हैं असि व वरुणा
पूरी तरह से टैप नहीं हुआ है नाला
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