चारों तरह हरियाली से भरा शानदार कैंपस, पढ़ाई का बेहतरीन माहौल और प्राचीन व नवीन पद्धति का समावेश...। महामना की कर्मस्थली काशी हिंदू विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी खासियत यही है। बीएचयू का यही आकर्षण देश-दुनिया के मेधावियों को अपनी ओर खींचता है। देश की कई प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में दाखिले का मौका होने के बावजूद छात्रों की पहली पसंद बीएचयू ही है। मंगलवार को काउंसलिंग के लिए अलग अलग प्रांतों से आए युवाओं ने इस बात को साबित भी किया। कोई देश की टॉप यूनिवर्सिटी में शुमार दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में एडमिशन छोड़ कर आया तो कोई पुणे की यूनिवर्सिटी का मौका।
पटना की खुशबू मंगलवार को बीएचयू में काउंसलिंग के लिए आईं थीं। खुशबू के लिए ये पहला मौका था जब उन्होंने इतने बड़े कैंपस में कदम रखा था। यहां की हरियाली, विशाल भवनों ने उनका मन मोह लिया। खुशबू ने बताया कि पटना यूनिवर्सिटी में भी इंट्रेस दिया है लेकिन जब बीएचयू से कॉल आई तो उन्होंने वहां की मेरिट देखी ही नहीं। सीधे यहां चली आईं। बनारस की राजेश्वरी ने पुणे और दिल्ली यूनिवर्सिटी दोनों के लिए आवेदन किया था। दोनों जगह मेरिट में जगह बनाई लेकिन दाखिला बीएचयू में ले रही हैं। राजेश्वरी का कहना है कि मैं बनारस की होकर बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में ना पढ़ूं, ऐसा हो ही नहीं सकता। ये खुशकिस्मती है कि मैंने यहां क्वालिफाई कर लिया।
बीएससी में लखनऊ से राहुल सिंह व बीकॉम में राजस्थान से एडमिशन लेने आई मनीषा सेन की भी पहली पसंद बीएचयू ही है। उन्होंने अपने होम टाउन में किसी कॉलेज में दाखिला लेने के बजाय बीएचयू में एडमिशन लेना बेहतर समझा। उनका कहना है कि बीकॉम और खास तौर से साइंस की पढ़ाई के लिए बीएचयू बेस्ट है। यहां अंतरविषयी शोध के लिए भी अच्छा मौका है। ऐसे ही अमीषा पाठक ने भी दिल्ली यूनिवर्सिटी में मेरिट में आने के बावजूद बीएचयू में एडमिशन लिया।