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सात सुरों की ताल कोरोना से हुई बेताल

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शादी-विवाह का मौसम हो और आर्केस्ट्रा ना हो तो कुछ सूना सा लगता था। कोरोना संक्रमण ने आर्केस्ट्रा संचालकों की सुर-ताल बिगाड़ कर रख दी है। पिछले साल से ही लग्न में न तो आर्केस्ट्रा की बुकिंग हो रही है और न ही कलाकारों को काम मिल रहा है।
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शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में आर्केस्ट्रा शान शौकत का धंधा था और शादी ब्याह में इसकी जबरदस्त मांग थी। लगन के सीजन में हर दूसरे दिन पार्टी बुक रहती थी। लेकिन पिछले साल से कोरोना के तांडव ने आर्केस्ट्रा के नृत्य को भूला सा दिया है। आर्केस्ट्रा संचालकों का कहना है कि बंदी के कारण कलाकारों के सामने भुखमरी की समस्या आ गई है। पहले शादी-ब्याह के सीजन में आर्केस्ट्रा करके साल भर खाने-पीने का इंतजाम हो जाता था।
सरैया के मिथिलेश बताते हैं कि शादी, ब्याह, जन्मदिन के अवसर पर आर्केस्ट्रा की बुकिंग कराने के लिए दूर-दूर से लोग आते थे। आर्केस्ट्रा के 10 से 18 लोगों की जरूरत होती थी। एक बुकिंग कलाकारों की संख्या के आधार पर 12000 से 30000 के बीच में होती थी। सब की रोजी-रोटी चली गई है।
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महिला कलाकारों की हालत ज्यादा खराब
आर्केस्ट्रा बैंड में काम करने वाली महिला कलाकारों की हालत सबसे अधिक खराब है। रामनगर क्षेत्र में महिला कलाकारों की संख्या सबसे अधिक है। यह महिलाएं अधिकतर कोलकाता से आकर एक समूह में किराए के मकान में रामनगर में रहती थीं, लेकिन कोरोना कर्फ्यू के कारण वह भी अपने-अपने घरों को लौट गई हैं।
घूम-घूमकर आर्केस्ट्रा देखने वाले भी हैं परेशान
शादी ब्याह में आर्केस्ट्रा पार्टी जहां बारातियों का मनोरंजन करती थी वहीं पर तमाम गांव के ऐसे लोग भी होते थे जो आर्केस्ट्रा में जाकर नृत्य, गीत और संगीत का आनंद उठाते थे। ऐसे रसिक भी काफी परेशान हैं । आर्केस्ट्रा के रसिक सिर्फ अपने गांव में ही नहीं बल्कि चार-पांच किलोमीटर के इलाके में जहां कहीं भी आर्केस्ट्रा होता था वहां देखने के लिए चले जाते थे। गांव में शादी ब्याह तो हो रहे हैं पर आर्केस्ट्रा नहीं हो रहा है। लिहाजा कुछ ऐसे रसिकों को सूना-सूना लग रहा है।
अकेले कौन सा होगा रियाज
कलाकार राजेश अवस्थी का कहना है कि अकेले में व्यक्ति कौन सा रियाज करेगा। सारे वाद्य यंत्र अब धूल फांक रहे हैं। कभी कभार उसे ठीक रखने के लिए छेड़ दिया जाता है। परंतु राग और साज को ठीक रखने के लिए सभी कलाकारों का एक साथ होना जरूरी है जो इस समय संभव नहीं हो पा रहा है।
गुजर बसर करने के लिए उधार मांग रहे हैं कलाकार
सारनाथ। कोरोना संक्रमण के कारण शादी-विवाह में आर्केस्ट्रा की बुकिंग नहीं हो रही है। पिछले साल ही इससे जुड़े लोग बेरोजगारी का संकट झेल रहे हैं। जयरामपुर निवासी आर्केस्ट्रा संचालक शंभू पाल ने बताया कि कोरोना काल से पहले हमें शादी विवाह में कम से कम 40 से 42 बुकिंग मिल जाती थी। हमारे साथ इस आर्केस्ट्रा ग्रुप में 12 से 14 लोग काम करते थे। कोरोना के कारण अब एक भी बुकिंग नहीं हो पा रही है।
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