आईआईटी बीएचयू के छात्र तकनीकी विषयों के साथ काशी के साहित्य और संस्कृतियों का भी ज्ञान हासिल करेंगे। साल भर पहले आईआईटी के पाठ्यक्रम में मानविकी विषयों को शामिल किया गया था, अब मौजूदा सेमेस्टर से ‘प्रोजेक्ट वाराणसी’ भी लागू कर दिया गया है।
यह प्रोजेक्ट वर्क होगा। छात्र-छात्राएं काशी के इतिहास, सभ्यता एवं संस्कृति के अलावा साहित्य, दर्शन की जानकारी तो प्राप्त करेंगे ही, इससे उन्हें काशी के विकास के लिए नई तकनीक ईजाद करने में भी मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के नाते काशी के विकास को लेकर यूं भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है।
इसी क्रम में आईआईटी बीएचयू में इस सत्र से काशी पर अध्ययन की कार्ययोजना तैयार की गई है। यह कोर्स प्रोजेक्ट वर्क के रूप में है, जो बीटेक, एमटेक एवं पीएचडी समेत सभी कक्षाओं में लागू किया गया है। इसे पांच वर्गों गंगा, वाराणसी शहर, शिल्प, रामायण व साहित्य और सारनाथ में बांटा गया है।
इन पांचों प्रोजेक्ट के मुख्य अन्वेषक संबंधित विभागों के हेड बनाए गए हैं। सिविल इंजीनियरिंग, केमिकल इंजीनियरिंग और मानविकी विभाग के अध्यक्षों को गंगा प्रोजेक्ट का मुख्य अन्वेषक बनाया गया है। इसी तरह मेकैनिकल इंजीनियरिंग व मानविकी विभाग के अध्यक्ष वाराणसी सिटी प्रोजेक्ट के मुख्य अन्वेषक होंगे।
मैकेनिकल इंजीनियरिंग के हेड शिल्प और कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के हेड के अलावा साहित्य तथा मेटलर्जी विभाग के मुखिया को सारनाथ प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी दी गई है। एक प्रोजेक्ट तीन साल में पूरा होगा। इसकी पूरी रूपरेखा तय की जा चुकी है।