आठ दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने वाले पेंजिम च्वींग ने मृत्यु पूर्व मजिस्ट्रेट को दिए गए बयान में साफ कहा था कि उसने तिब्बत की आजादी के लिए आत्मदाह किया है। वह चाहता था कि भारत और अन्य पड़ोसी देश मिलकर चीन को सबक सिखाएं और तिब्बत को आजाद कराएं।
वह तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा से खासा प्रभावित था। इसका जिक्र उसने अपने साथियों से भी किया था।
केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के प्रमुख लोबसंग सिंगो 13 जुलाई को सारनाथ पहुंचे थे।
उसी दिन उन्होंने केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय परिसर में दिए गए भाषण में तिब्बत की आजादी का मुद्दा उठाया था। पेंजिम ने रात में भी अपने साथियों से लोबसंग सिंगो के भाषण का जिक्र किया था।
चर्चा यह भी रही कि उसने अपने एक दोस्त को लिखे पत्र में भी तिब्बत की आजादी समेत कई बातें लिखी थीं। हालांकि पत्र का पता नहीं चल सका है