वीडीए ने ही दे दी एनओसी
संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) ने खुद अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी कर दिया। प्राधिकरण प्रशासन ने एनएमसीजी व उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी पूरी तरह से भरोसे में नहीं लिया। इसी का नतीजा रहा कि वीडीए को एनजीटी के सवालों का जवाब देना भारी पड़ रहा है। नियमानुसार, एनएमसीजी व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनओसी लेना जरूरी होता है।
गंगा नदी के तल में ही तान दी टेंट सिटी
वाराणसी। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) को अंधेरे में रखकर गंगा के तल में ही टेंट सिटी तान दी गई। एनजीटी ने जब सख्ती दिखाई तो वीडीए के अधिकारियों को याद आया कि एनओसी लेनी भी जरूरी है। अब वीडीए ने एनएमसीजी को पत्र लिखकर एनओसी मांगी है। इस एनजीटी के तेवर तल्ख हैं।
एनजीटी ने वीडीए के अफसरों से पूछा है कि आप संचालन के बाद एनओसी की मांग कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट में साफ है कि टेंट सिटी बसाने के लिए गंगा से जुड़े सारे नियम और कानून को ताक पर रख दिए गए। इस मामले में एनएमसीजी को हर पल अंधेरे में रखा गया। पहले तो गंगा के तल में ही टेंट सिटी बसा दी गई, फिर बताया गया कि गंगा की धारा से इसकी दूरी सात मीटर है। जांच टीम ने स्थलीय निरीक्षण के दौरान देखा कि टेंट सिटी को गंगा की धारा में ही बसाया गया है। इसका उल्लेख भी उन्होंने अपनी रिपोर्ट में किया है।