बीएचयू के मालवीय शांति अनुसंधान केंद्र में मंगलवार को आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने शिक्षकों को विश्वामित्र बताया। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन अवसर पर उन्होंने कहा कि इन्हें छात्रों को वर्तमान दुनिया की कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने का काम सौंपा गया है।
21वीं सदी के लिए शैक्षिक सुधार: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और लोक नायक जयप्रकाश नारायण की विरासत के माध्यम से शिक्षा की पुनर्कल्पना विषय पर चल रहे सम्मेलन का मंगलवार को समापन हो गया। शिक्षा संकाय की पूर्व डीन प्रोफेसर अंजलि बाजपेयी की अध्यक्षता में भविष्य के लिए तैयार विश्वविद्यालय, एनईपी 2020 और यूनेस्को के शिक्षा के भविष्य के तहत उभरते शिक्षाशास्त्र पर मंथन हुआ। राष्ट्रीय शैक्षिक योजना और प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली की प्रोफेसर आरती श्रीवास्तव ने मुख्य प्रस्तुति दी।
एमआईटी विश्व शांति विश्वविद्यालय पुणे के प्रोफेसर दत्ता डांडगे ने उच्च शिक्षा में एआई की भूमिका को जरूरी बताया। कोल्हापुर की पूर्व प्रोफेसर रेखा डांडगे ने यूनेस्को की हरित शिक्षा साझेदारी और आईसीटीआरसी के समन्वयक डॉ. केशव सिंह ने न्यूरो शिक्षाशास्त्र के पहलुओं को समझाया। बीएचयू की प्रो. सोनाली सिंह की अध्यक्षता में लोक नायक जयप्रकाश नारायण की विरासत को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। शिक्षा, लोकतंत्र और नैतिक सार्वजनिक नेतृत्व पर एक गोलमेज नीति संवाद में जयप्रकाश नारायण के लोकनीति दर्शन पर चर्चा हुई।