उसी समय जलकल बिल्डिंग की तरफ से एक विस्फोट की आवाज सुनाई दी, जिससे भगदड़ मची हुई थी। इसी बीच दूसरा विस्फोट बलदेव प्लाजा पेट्रोल पंप के बगल में साइकिल में टंगे झोले में रखे हुए बम के कारण हुआ। अफरा-तफरी का माहौल था। धड़ाधड़ दुकानें बंद होने लगीं। लोग अभी कुछ समझ पाते कि तीसरा विस्फोट गणेश चौराहे पर हुआ। इसकी सूचना पाकर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंच गई और विस्फोट वाले स्थानों से भीड़ को हटाने लगी। दौरान विवेचना अभियुक्त तारिक काजमी का नाम प्रकाश में आया और विवेचक ने अभियुक्त के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। साक्ष्यों के आधार पर सोमवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया।
तारिक की गिरफ्तारी के बाद आजमगढ़ में महीनों चला था आंदोलन
जनपद के रानी की सराय थाना क्षेत्र का रहने वाले तारिक काजमी को एसटीएफ ने दिसंबर 2007 में बाराबंकी रेलवे स्टेशन से जौनपुर जिला निवासी खालिद मुजाहिद के साथ गिरफ्तार किया था। उसके पास से भारी मात्रा में गोला, बारूद व असलहा भी बरामद हुआ था। तारिक की गिरफ्तारी के बाद जिले में महीनों आंदोलन चला था। जिस समय तारिक की गिरफ्तारी हुई, उस समय प्रदेश में बसपा की सरकार थी। जिले में तारिक की गिरफ्तारी पर राजनीति शुरू हो गई। कुछ लोगों ने तो यहां तक दावा किया कि तारिक को एसटीएफ ने रानी की सराय स्थित उसके दवाखाने से उठाया और फिर बाराबंकी से असलहों के साथ गिरफ्तारी दिखाई। 2013 में तत्कालीन सपा सरकार में तारिक से मुकदमा वापस लेने की भी तैयारी हुई, लेकिन कोर्ट ने ऐसा करने से मना कर दिया। अब कोर्ट ने प्रदेश में हुए सीरियल बम धमाकों में तारिक को उम्रकैद की सजा सुना दी है तो जिला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।