फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सफलता की कहानी: एमबीबीएस में नहीं मिला दाखिला तो डॉ. तमन्ना बानो ने चुनी आयुर्वेद की राह, मिलेंगे दो मेडल

Sat, 18 Jul 2026 06:36 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में तमन्ना बानो को दो गोल्ड मेडल मिलेंगे। तमन्ना बानो ने आयुर्वेद में सर्वोच्च अंक प्राप्त किया। तमन्ना राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज चौकाघाट की छात्रा हैं। 
विज्ञापन
तमन्ना बानो - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में आयुर्वेद में सर्वोच्च अंक पाने वाली राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज चौकाघाट की छात्रा डॉ. तमन्ना बानो को दो स्वर्ण पदक मिलेंगे। अमर उजाला से बातचीत में तमन्ना ने कहा कि इंटरमीडिएट करने के बाद डॉक्टर बनने का सपना था। एमबीबीएस करना चाहती थी। लेकिन एमबीबीएस में दाखिला नहीं मिल सका लेकिन हार नहीं मानी। अब बीएएमएस की पढ़ाई कर आयुर्वेद के माध्यम से इस सपने को साकार कर रही हूं।

विज्ञापन


दो स्वर्ण पदक मिलने से तमन्ना बहुत खुश हैं। मूल रूप से प्रयागराज के मंसूराबाद निवासी डॉ. तमन्ना के पिता जुनैद अहमद खान व्यापारी हैं। मां मुजफ्फरी बानो गृहिणी हैं। आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य प्रो. दिनेश कुमार मौर्या ने तमन्ना को बधाई देते हुए इसे कॉलेज के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है। तमन्ना ने बताया कि आयुर्वेद की पढ़ाई का ज्यादातर हिस्सा संस्कृत भाषा का है। इसके बाद भी मुझे कभी पढ़ने में कोई परेशानी नहीं हुई।

तमन्ना ने कहा कि आयुर्वेद हमारी पैथी है। इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि लोगों का इस ओर झुकाव और बढ़े। बीएएमएस करने वाले छात्रों को अपने मन ये बात निकाल देनी चाहिए कि एमबीबीएस नहीं हुआ तो बीएएमएस लेना पड़ा। हर पैथी को सम्मान मिलना चाहिए। मेडिकल की शुरुआत ही आयुर्वेद विद्या से हुई है। बताया कि भाई नीट की तैयारी कर रहा है।

विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

परिवार का मिला पूरा सहयोग, कोविड में मां के काम आई पढ़ाई
तमन्ना ने बताया कि बीएएमएस की पढ़ाई में परिवार के सदस्यों का पूरा सहयोग मिला। शुरू में संस्कृत पढ़ने, बोलने में थोड़ा अटपटा सा लगा लेकिन बाद में अच्छा लगने लगा। कोविड में घर पर रहने के दौरान भी पढ़ाई की। मेरी मम्मी की आंख लाल हो जाती थी। बहुत इलाज के बाद भी ठीक नहीं हुआ। मैंने उनका तर्पण क्रिया के माध्यम से उपचार किया। इसके बाद मम्मी की आंख ठीक हो गई। मम्मी को भी अच्छा लगा और मेरा भी विश्वास बढ़ा। आयुर्वेद की महत्ता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें