बताया जाता है कि उन लोगों के सभी लाइसेंस मुख्तार की मदद से बने हैं और इन असलहों का प्रयोग मुख्तार के अवैध कारोबार के संचालन में होता है। पुलिस यह स्वीकार कर चुकी है कि जिले में कुछ मुख्तार करीबियों के असलहों की जांच करा रही है लेकिन यह जांच कब पूरी होगी और कब कार्रवाई की जाएगी। इस पर पुलिस महकमा पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए है।
पहले गाजीपुर और अब जौनपुर में मुख्तार के करीबियों के असलहा लाइसेंस निरस्त होने के बाद अब जिले में भी इस बात की चर्चा आम हो गई है कि जिले में मिले मुख्तार करीबियों के असलहा लाइसेंस भी जल्द ही निरस्त किए जाएंगे।
वहीं पुलिस विभाग के सूत्रों की मानें तो अधिक से अधिक एक से दो दिनों में जिले में भी गाजीपुर व जौनपुर जैसी कार्रवाई हो सकती है। पुलिस महकमा गुपचुप तरीके से काम कर रहा है और जल्द ही डीएम को मुख्तार के करीबियों को जारी असलहों की सूची सौंप कर उसे निरस्त करने की संस्तुति की जा सकती है।