वाराणसी। राष्ट्रीय चिंतक केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि सत्ता परिवर्तन से ज्यादा महत्वपूर्ण और बड़ा काम है व्यवस्था परिवर्तन। मौजूदा दौर व्यवस्था परिवर्तन का है। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हर क्षेत्र में बदलाव हो रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन जैसे सामाजिक सेवा से जुड़े संगठनों को और भी सजग रहने की जरूरत है।
शुक्रवार की शाम दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ परिसर में आयोजित राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के दसवें स्थापना दिवस समारोह के उद्घाटन सत्र में गोविंदाचार्य ने राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन की एक दशक की यात्रा का सिंहावलोकन करते हुए कहा कि साल 2004 में 15 मई को संगठन की स्थापना का तात्कालिक संदर्भ था। ऐसा दिख रहा था कि आजादी के 57 साल बाद भारत फिर एक बार फिर विदेशी मूल की
नेता के हाथों में जा रहा है। उन परिस्थितियों में स्थापित संगठन आज एक राष्ट्रव्यापी ढांचा प्राप्त कर चुका है। इसलिए अब हमारी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि आंदोलन के कार्यकर्ता महात्मा गांधी के जीवन, धर्मपाल की इतिहास दृष्टि, रवींद्र शर्मा की समाज दृष्टि और जीवन विद्या में प्रशिक्षित होकर काम करें। आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक बसवराज पाटिल ने
बताया कि देश के 15 राज्यों के 150 चुनिंदा प्रतिनिधि शनिवार से शुरू दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यसमिति में भाग लेंगे। कार्यसमिति में कश्मीर समस्या, भूमि अधिग्रहण अध्यादेश और किसानों के मुद्दे पर चर्चा होगी। उद्घाटन सत्र में बिहार के पवन श्रीवास्तव, गदाधर विद्रोही, गोविंद कुमार, शाह आनंदकृष्ण, महाराष्ट्र के मुन्ना महाजन, केरल के विजू, राजस्थान के जितेंद्र चौधरी, कमलेश चौरसिया, गिरिराज गुप्ता, यूपी की रश्मि सिंह सहित सौ से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए।