जनसुविधा के नाम पर शहर के व्यस्त चौराहों, सड़कों पर बनाए गए नगर निगम के पार्किंग स्थल अदूरदर्शिता और बेपरवाही की नजीर बन गए हैं। तमाम मशक्कतों, नियम-निर्देशों के बावजूद शहर की सबसे बड़ी समस्या जाम का हल नहीं निकल पा रहा है तो इसकी बड़ी वजह खुद नगर निगम प्रशासन की यह अदूरदर्शिता ही है। बिना सोचे-समझे, वस्तुस्थिति की गहराई से पड़ताल किए बिना लिए गए पार्किंग के फैसले ने पूरे शहर के लिए सांसत खड़ी कर दी है। व्यस्त चौराहों के पास, सड़कों पर निर्धारित पार्किंग स्थलों से रोजाना जाम लग रहा है और लाखों लोग परेशान हो रहे हैं लेकिन नगर निगम के अफसरों ने आंखें मूंद रखी हैं।
शहर को स्मार्ट सिटी बनाने और स्वच्छ शहरों की सूची में शामिल कराने के लिए नगर निगम प्रशासन लाखों रुपये खर्च कर रहा है। नागरिकों में जागरूकता के लिए नुक्कड़ नाटक और स्वच्छता रैली निकाली जा रही है लेकिन, शहर भर में बेतरतीब ढंग से बने पार्किंग स्थलों पर निगम प्रशासन का ध्यान नहीं है। नगर निगम और ठेकेदारों के सिंडिकेट ने शहर के अतिव्यस्त मैदागिन सहित दर्जन भर से अधिक चौराहों की गत बना दी है।
मैदागिन चौराहे पर तो बीच सड़क पार्किंग बना दी गई है। इसके चलते इस भीड़भाड़ वाले इलाके में दिनभर जाम की स्थिति रहती है। वाहनों की आवाजाही छोड़िए, पैदल चलना भी किसी बड़ी दुश्वारी से कम नहीं। इन्हीं समस्याओं पर यह पार्किंग एक जून 2015 को निरस्त कर दी गई थी लेकिन नगर निगम और ठेकेदारों के सिंडिकेट ने फिर जोर-जुगत कर इसका ठेका करा लिया। मैदागिन से चौक, गौदौलिया तक, विशेश्वरगंज और कबीरचौरा से लोहटिया तक चौबीसों घंटे आवाजाही बनी रहती है। मैदागिन से गोदौलिया मार्ग पर तो मणिकर्णिका घाट जाने वाले, दशाश्वमेध और विश्वनाथ मंदिर जाने वाले सैलानियों, तीर्थयात्रियों, शवयात्रियों का रेला लगा रहता है।
इनके वाहन मैदागिन पर ही खड़े होते हैं। वाहनों के दबाव से गोलघर मैदागिन पर बने स्टैंड का दायरा इतना बढ़ जाता है कि आधी से अधिक सड़क पार्किंग में ही खप जाती है। इससे कबीरचौरा, लोहटिया, मैदागिन, चौक, विशेश्वरगंज तक जाम की समस्या उत्पन्न होती है। सामान्य स्थिति में भी आवाजाही मुश्किल होती है। ऊपर से जब ट्रैफिक का दबाव बढ़ता है तो हालात से निबटना और मुश्किल हो जाता है।