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जानें काैन हैं सैयद हसन: बना चुके हैं 1000 कुंडलियां, इल्म-ए-जफर की जगह ज्योतिष शास्त्र से निकालते हैं मुर्हूत

Sun, 23 Mar 2025 08:05 AM IST
अमन विश्वकर्मा हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

सैयद हसन रजा ने बीएचयू से धर्मशास्त्र की पढ़ाई की है। ज्योतिष-वास्तु में यूजी-पीजी डिप्लोमा करने के बाद एमए-एस्ट्रोलॉजी किया। उनके पास हिन्दू और मुस्लिम क्लाइंट्स आते हैं।
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सैयद हसन रजा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीएचयू से धर्मशास्त्र की पढ़ाई कर ज्योतिषी बने सैयद हसन रजा हिंदू-मुस्लिम क्लाइंट्स की दुविधाओं को दूर करते हैं। इस्लाम धर्म में भाग्य बताने वाली विधा इल्म-ए-जफर की जगह ज्योतिष शास्त्र के सहारे सैयद कुंडलियां बनाते हैं। अनुष्ठान के दिन तय करते हैं। पिछले 4 साल में 1000 से ज्यादा कुंडलियां बना चुके हैं।

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बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में चल रहे अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन में शनिवार को आए सैयद ने अमर उजाला संवाददाता से खास बात की। उन्होंने बताया कि बीएचयू से ही स्नातक और परास्नातक में डिप्लोमा किया है।

2022 के बाद से अब तक प्रैक्टिस कर रहा हूं। घर चंदौली के मुगलसराय के बरहुली गांव में है। पिता किसान और शायर मोहसिन रजा मायम चंदौलवी हैं। ज्योतिष-वास्तु में यूजी-पीजी डिप्लोमा करने के बाद एमए-एस्ट्रोलॉजी किया।

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खेती-किसानी से पड़ा ज्योतिष का बीज
सैयद ने कहा, भारत के किसान अपनी खेती की शुरुआत मुहूर्त तिथि-नक्षत्र देखकर ही करते हैं। दादा और पिता दोनों ही किसान हैं। मेरे अंदर भी वहीं से ज्योतिष का बीज पड़ा और मैंने इसकी शिक्षा ली। पिता ने इस पढ़ाई के लिए पूरी मदद की और धन मुहैया कराया। मेरे घर के परिवेश में ज्ञान लेने के लिए कोई रोकटोक नहीं थी। हर किसी को कहीं से भी ज्ञान लेने का अधिकार है।
हर वर्ग के लोग आते हैं

सैयद ने कहा कि हर वर्ग के अमीर-गरीब हमारे पास आते हैं। अपनी दुविधाओं का निवारण करते हैं। भाग्य कैसा रहेगा ये भी बताया जाता है। विवाह के लिए कुंडली और शुभ मुहूर्त निकाली जाती है। कुंडली विश्लेषण, कुंडली तैयार करना, पंचांग से तिथि का निर्धारण करना आदि काम आसानी से किया जाता है।
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