खेती-किसानी से पड़ा ज्योतिष का बीज
सैयद ने कहा, भारत के किसान अपनी खेती की शुरुआत मुहूर्त तिथि-नक्षत्र देखकर ही करते हैं। दादा और पिता दोनों ही किसान हैं। मेरे अंदर भी वहीं से ज्योतिष का बीज पड़ा और मैंने इसकी शिक्षा ली। पिता ने इस पढ़ाई के लिए पूरी मदद की और धन मुहैया कराया। मेरे घर के परिवेश में ज्ञान लेने के लिए कोई रोकटोक नहीं थी। हर किसी को कहीं से भी ज्ञान लेने का अधिकार है।
हर वर्ग के लोग आते हैं
सैयद ने कहा कि हर वर्ग के अमीर-गरीब हमारे पास आते हैं। अपनी दुविधाओं का निवारण करते हैं। भाग्य कैसा रहेगा ये भी बताया जाता है। विवाह के लिए कुंडली और शुभ मुहूर्त निकाली जाती है। कुंडली विश्लेषण, कुंडली तैयार करना, पंचांग से तिथि का निर्धारण करना आदि काम आसानी से किया जाता है।