द्वारका-शारदा, ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने गुरुवार को केदारघाट स्थित विद्यामठ में कहा कि नोटबंदी का फैसला अव्यावहारिक, अदूरदर्शी और आर्थिक स्वतंत्रता पर बड़ी चोट है। इससे धर्म की हानि होगी।
कहा कि कोई व्यक्ति अपना धन अपनी इच्छानुसार खर्च नहीं कर सकेगा तो कमाएगा क्यों? लोगों को आत्मिक संतुष्टि धर्म के आचरण से होती है, सिर्फ परिवार के पोषण से नहीं।
जब अपना ही धन खर्च करने के लिए नहीं मिलेगा तो कोई यज्ञ, दान, तीर्थाटन कैसे कर सकेगा। भारत की जनता परलोक में विश्वास करती है। परलोक बिगाड़ने वालों को सहन नहीं कर सकती।
शंकराचार्य ने कहा कि आखिर कौन सा आर्थिक आपातकाल लग गया कि सरकार को धन की निकासी पर समय सीमा तय करनी पड़ी।
बैंक के रुपये निकालने की सीमा का विरोध करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि कोई व्यक्ति अपना कमरा खुद भीतर से बंद कर ले तो सुख से सोता है लेकिन जब कोई बाहर से उसी कमरे को एक मिनट के लिए भी बंद कर देता है तो वह सह नहीं सकता।
वह कदम दंड संहिता के तहत अपराध हो जाता है। शंकराचार्य ने नोटबंदी को असफल बताते हुए पीएम से अपेक्षा की कि वह अपने निर्णय को औचित्य और प्रमाणों से सिद्ध करें, न कि पांच राज्यों के विस चुनावों को नोटबंदी पर जनता की मुहर के रूप में प्रचारित कर लीपापोती का प्रयास करें।