कमीशन के लालच में ग्राम प्रधानों और सचिवों ने गरीबों का हक मारते हुए रेवड़ी की तरह अपात्रों को लोहिया आवास बांट दिए हैं। इतना ही नहीं, लाभार्थियों के पास बुक जब्त कर उनके खातों से धनराशि भी निकालने की शिकायतें आई हैं। जिले के आठों ब्लाकों के लोहिया गांवों में ऐसी खेल हुआ है। अमर उजाला ने इस घपलेबाजी की परत दर परत खोली तो जिला प्रशासन हरकत में आया। अब दोषियों के खिलाफ एफआईआर और रिकवरी की तैयारी शुरू हो गई है। सीडीओ ने हर ब्लॉक के लिए जांच टीमें गठित कर दी है। तीन दिन बाद में रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी।
वित्तीय वर्ष 2016-17 में 20.43 करोड़ की लागत से जिले के 27 गांवों में लोहिया 743 आवास बनने हैं। 10.21 करोड़ रुपये की पहली किस्त आने पर आधी धनराशि सभी लाभार्थियों के खाते में भेज दी गई है। यह वित्तीय वर्ष खत्म होने में तीन महीने बचे हैं लेकिन अभी तक एक भी आवास का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ।
चिरईगांव के सिंहवार में वर्ष 2014-15 में जो आवास बने थे, उनमें अभी तक शौचालय ही नहीं बन पाए। इस साल मंजूर हुए आवासों का निर्माण अभी हुआ ही नहीं। काशी विद्यापीठ विकास खंड के लोहिया गांव ककरहियां में सात लोगों को लोहिया आवास मिला है। उनके खाते में पैसा भी है लेकिन उनका आवास नहीं बन रहा है। गांव की लाभार्थी रीना, सीमा देवी, इंद्रा, किरन, सवीतरा, चांदनी, रीता का कहना है की नोटबंदी के चलते बैंकों से पर्याप्त रुपये ही नहीं निकल सके तो आवास कैसे बने।
कछवा रोड के ठटरा गांव की लाभार्थी सीता देवी खाते में पहली किस्त में के रूप में 1.47 लाख रुपये आने के बाद उन्होंने कच्चा घर गिरवाकर नया निर्माण शुरू करा दिया अब बैंक से पैसे ही नहीं मिल रहे। काशी गोमती संयुक्त ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों का कहना है कि आपका जनधन योजना के तहत खाता खोला गया है। इसलिए इस खाते से एक महीने में दस हजार रुपये निकाले जा सकते हैं। ऐसे में निर्माण कार्य रुका हुआ है।
चोलापुर ब्लॉक के दानगंज क्षेत्र के महमूदपुर गांव की लाभार्थी लक्ष्मीना और लालमनी ने बताया कि रोजगार सेवक उन्हें बैंक ले जाकर उनके खाते से रुपये निकलवाता है। उन्हें मात्र 22000 रुपये उसे मिले हैं। बाकी रुपये उसने निर्माण सामग्री खरीद के नाम पर दूसरे खातों में ट्रांसफर करवाया दिया है। बताया कि अब रुपये न होने पर आवास का निर्माण कार्य रुक गया है। इसी तरह आराजीलाइन ब्लॉक के चंदापुर गांव में 2014 के आवास अभी अधूरे पड़े हैं। यहां की लाभार्थी बबनी देवी कहती हैं कि शौचालय से लेकर खिड़की और दरवाजे का काम लटका हुआ है। उन्होंने बताया कि जब खाते से रुपये निकालते तो ग्राम प्रधान निर्माण कराने के नाम पर ले लेता था लेकिन काम पूरा कराया ही नहीं।