मानवाधिकार की सीमा में कार्य करने से विश्व की कोई भी शक्ति हमें इससे वंचित नहीं कर सकती। स्वामी निश्च्छलानंद सरस्वती ने एलान किया कि मंदिरों को संरक्षित करने के लिए काशी में तमाम शंकराचार्यों, प्रमुख पीठों के महंत एवं धर्माचार्यों का सम्मेलन भी आयोजित करेंगे। इस मौके पर प्रो. विदेंश्वरी प्रसाद मिश्र, रूपेश पांडेय, राजीव झा, डॉ. पद्माकर दुबे आदि लोग मौजूद रहे।