शंकराचार्य ने कहा कि संस्कृत का प्रचार होना चाहिए। यह हमें सुसंस्कृत बनाती है। गो रक्षा के मामले में सरकारें गंभीर नहीं हैं। उस मुद्दे पर गंभीरता पूर्वक विचार करके गो रक्षा करनी होगी। मनमोहन सिंह की जब सरकार केंद्र में थी तब नरेंद्र मोदी ने कहा था कि गो हत्या बंद हो।
वे गायों की रक्षा के लिए पीएम बने, लेकिन अब कहते हैं कि गो रक्षक गुंडे हैं। राजनेताओं को राजा कहकर चुटकी लेते हुए कहा कि आज राजनेताओं के राजा ही राजगुरु हो गए हैं। एक प्रश्न के उत्तर में भक्त की परिभाषा, लक्षण के बारे में बताया। कहा कि ज्ञानी को भी भक्त कहा गया है। नारायण प्रथम गुरु थे।
जीव समूह में निवास करने वाले नारायण हैं। क्षीर सागर में शयन करने से वे नारायण हैं। भौतिकवाद पर कहा कि यह शब्द भूत से बना है। कुछ भूत कर्म परेशान करते हैं। गीता के 13वें अध्याय में कहा गया है कि ओम का नाम प्रकृति है। जो प्रेम की तरह ही ढाई अक्षर का है। कहा भी गया है कि ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय। इसलिए ब्रह्म से प्रेम करो। ब्रह्म की शरण में जाना ही ज्ञान है।
शंकराचार्य एक सप्ताह करेंगे प्रवास
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती 23 अप्रैल तक काशी में प्रवास करेंगे। 24 को चले जाएंगे। उनके शिष्य स्वामी निर्विकल्पा नंद ने बताया कि देश के कई भागों में संपन्न हो चुके साधना व राष्ट्र रक्षा शिविर इस वर्ष काशी में 20, 21, 22 अप्रैल तक होगा। मठ में विविध कर्यक्रम होंगे। शंकराचार्य प्रवास के दौरान 23 अप्रैल को मठ में नव निर्मित मंदिर में भगवान दक्षिणामूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करेंगे। 21 को आदि शंकराचार्य का प्राकट्य मनाया जाएगा।