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सहजता ही ताकत थी स्वामी अग्निवेश की

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वाराणसी। स्वामी अग्निवेश ने मानवता और समता मूलक समाज के लिए काफी काम किया। उनकी सहजता ही उनकी ताकत थी। आम आदमी के लिए भी वह जिस सहजता से उपलब्ध थे उसका कोई जोड़ नहीं है। काशी में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में उनका अक्सर आना होता था। यह कहना है जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के वरिष्ठ प्रधान प्रमोद आर्य का। उन्होंने बताया कि गरीबों और मजदूरों के लिए उन्होंने जीवन पर्यंत काम किया। 1994 में बचपन बचाओ आंदोलन में यूपी कॉलेज में उन्होंने ओजस्वी व्याख्यान दिया था। उन्होंने कहा था कि मजदूरों को भी शिक्षा की रोशनी पहुंचनी चाहिए। इससे उन्हें यह ज्ञान होगा कि वह क्या कर रहे हैं और उन्हें क्या करना चाहिए। जिला आर्य प्रतिनिधि सभा की ओर से आयोजित व्याख्यानमाला को भी उन्होंने संबोधित किया था।
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काशी से दी थी शास्त्रार्थ की चुनौती
सरोद वादक पं. विकास महाराज ने बताया कि 2018 में स्वामी अग्निवेश ने अंधविश्वास और पाखंड समाप्त करने के लिए पूरे विश्व को शास्त्रार्थ करने की चुनौती दी थी। दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में विश्व वेद सम्मेलन में शास्त्रार्थ में देश और विदेश के विद्वानों ने हिस्सा लिया। पं. विकास महाराज ने कहा कि वेदों लेकर उनकी दृष्टि एकदम साफ थी। उन्होंने कहा था कि वेदों का संदेश देने का बीड़ा बनारस उठाए तो चमत्कार होगा। वेदों के बारे में भ्रम फैलाया गया है। वेदों में कहीं जातिवाद नहीं है। मांसाहार खत्म करके शाकाहार, नशामुक्ति की ओर जाना है तो वेदों की ओर लौटो। भ्रष्टाचार मिटाने के लिए वेदों की ओर लौटो। अंधविश्वास और पाखंड मुक्त समाज बनाना है तो वेदों की ओर लौटो।
पहली मुलाकात ने किया प्रभावित
पं. विकास महाराज ने बताया कि पहली बार मेरी मुलाकात स्वामी अग्निवेश जी से 1987 में यूपी कॉलेज में एक कार्यक्रम में हुई थी। इस दौरान कैलाश सत्यार्थी भी थे। उनसे पहली मुलाकात ने मुझे इतना प्रभावित किया कि मैं उनसे जुड़ गया। बंधुआ मजदूरी और बाल मजदूरी पर उनके आंदोलनों का मैं हिस्सा भी रहा। यूपी, बिहार, पंजाब हर जगह मैं उनके साथ था। एक कलाकार के रूप में मेरा काम था लोगों को संगीत के माध्यम से जागरूक करना। हम लोग अपनी बात भी रखते थे और लोग संगीत के साथ भाषण भी सुनते थे। मुझे दुख है कि मेरा अभिन्न साथी आज चला गया। मैं उनकी सहजता का कायल था।
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