श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय के अनुसार तीन मार्च को फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के चंद्रोदयकाल में ग्रहण शाम छह से 6:48 बजे तक रहेगा। यह सिंह राशि पर होगा। इस राशि वालों को विशेष पूजन अर्चन करना चाहिए, ताकि ग्रहण का प्रभाव न पड़े। जबकि बाकी राशि वालों पर इसका कोई असर नहीं होगा।
रात में कर पाएंगे माता चौसठी देवी के दर्शन: काशी की परंपरा में माता चौसठी देवी मंदिर में दर्शन, पूजन और अबीर-गुलाल चढ़ाने के बाद होली खेली जाती है। इस बार उन्हें काफी कम समय मिलेगा। ग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक लग जाएगा। देर शाम तक ग्रहण रहेगा। ग्रहण खत्म होने के बाद मंदिरों की सफाई, आरती और पूजन के बाद ही दर्शन शुरू होंगे। भक्त माता का दर्शन रात में शयन आरती तक ही कर पाएंगे।
दोपहर 3:20 बजे से पूर्वी एशिया व अमेरिका में ग्रहण
चंद्रग्रहण भारतीय समय तीन मार्च को अपराह्न 03:20 बजे से लगेगा। इसलिए भारत में ग्रहण का प्रारंभ और मध्यकाल नहीं दिखेगा। यहां चंद्रोदय के बाद ही दिखाई देगा। ग्रहण का मोक्षकाल शाम छह से 6:48 बजे तक रहेगा। चंद्रोदय के पहले पूर्वी एशिया, प्रशांत महासागर, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया में ग्रहण दिखाई देगा। ग्रहण के प्रारंभकाल के अनुसार सूतक सुबह 6:20 बजे तथा भारत में चंद्रोदयकाल के अनुसार सुबह नौ बजे से लगेगा। सूतक लगते ही मंदिरों के पट बंद हो जाएंगे।