भ्रष्टाचार के आरोप में फतेहपुर के निलंबित डीएम कुमार प्रशांत पर चंदौली में भी 60 लाख रुपये के घोटाले का आरोप लग चुका है। उनके स्थानांतरण के बाद घोटाले की पोल खुली थी। शौचालय निर्माण में घोटाले के मामले में कई अधिकारियों पर कार्रवाई भी हुई थी लेकिन तब डीएम कुमार प्रशांत बच गए थे।
मूल रूप से मऊ के रहने वाले कुमार प्रशांत लंबे समय तक गोरखपुर में सीडीओ रहे। पहली बार चंदौली के डीएम बने कुमार प्रशांत एक वर्ष तक यहां तैनात रहे। मार्च 2016 से अप्रैल 2017 के बीच नमामि गंगे योजना एवं गंगा एक्शन प्लान के तहत गंगा किनारे स्थित गांव में स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त करने के लिए लिए बड़े पैमाने पर शौचालयों का निर्माण कराया गया।
शौचालय निर्माण का ठेका लखनऊ के गोमती खंड स्थित डीएमआर इंफोसिस्टम नाम की प्राइवेट कंपनी को दे दिया गया। इसके तहत धानापुर ब्लॉक के रामपुर-दिया गांव में 100 शौचालयों के लिए 12 लाख रुपये, हिंगुतरगढ में 100 शौचालयों के लिए 12 लाख रुपये, वहीं चहनिया ब्लॉक के कैली गांव में शौचालयों के लिए 12 लाख रुपये, जमालपुर गांव में 100 शौचालयों के लिए 12 लाख रुपये और रौना गांव में 70 शौचालय के लिए आठ लाख 40 हजार रुपये दिए गए।
तीन जून को डीपीआरओ अनिल सिंह ने चार्ज लिया और जांच की तथा स्वच्छता अभियान के निदेशक विजय किरण आनंद ने जिले का दौरा किया तो शौचालय बने बिना ही धन निकासी का पता चला।