एक हेलीकॉप्टर पर लगे उपकरणों के माध्यम से डेटा संग्रह चरणबद्ध तरीके से 13 दिसंबर (मौसम की स्थिति के आधार पर) से शुरू होगा। हेलीकॉप्टर उड़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय से अपेक्षित अनुमति मिल गई है और विमान और उपकरणों का निरीक्षण चल रहा है। क्योंकि प्रस्तावित वाराणसी-नई दिल्ली कॉरिडोर में बहुत चुनौतियां है।
इसमें घनी आबादी वाले शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों, राजमार्ग, सड़क, नदियां, खेत आदि शामिल हैं, जो इस गतिविधि को और अधिक चुनौतीपूर्ण बनाता है। इस वजह से एनएचएसआरसीएल ने लिडार तकनीकी अपनाने का फैसला लिया है।
रेल मंत्रालय ने एनएचएसआरसीएल को वाराणसी-नई दिल्ली हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा है। कॉरिडोर की अस्थायी लंबाई लगभग 800 किमी है।
एनएचएसआरसीएल की प्रवक्ता सुषमा गौड़ ने बताया कि सब कुछ ठीक रहा तो 13 दिसंबर से लिडार तकनीक का सहारा लेकर नईदिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड कॉरिडोर का सर्वेक्षण शुरू करा दिया जाएगा। इसके लिए रक्षा मंत्रालय से भी अनुमति मिल गई है।