नागरी नाटक मंडली में सुर गंगा संगीत महोत्सव में विभिन्न नृत्य शैलियों की एक साथ भावपूर्ण प्रस्तुति करते कलाकार।
सुरगंगा संगीत महोत्सव की 12वीं निशा शास्त्रीय संगीत के पुरोधा पंडित बलवंत राय भट्ट को समर्पित रही। मंगलवार को कबीरचौरा स्थित नागरी नाटक मंडली के प्रेक्षागृह में शास्त्रीय संगीत की बयार बही जिसपर हर कोई झूमता नजर आया। समारोह में गायन, वादन और नृत्य की अद्वितीय प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मदमस्त कर दिया। समारोह की पहली प्रस्तुति पंडित विष्णु मिश्रा का गायन रहा। उन्होंने राग धनाश्री छोटा ख्याल में निबद्ध ‘शंकर भंडारी भोले’ से निशा का शुभारंभ किया। इसके बाद देवाशीष दत्ता ने गायन पेश किया। उन्होंने राग कौशिक ध्वनि में ‘याद पिया की आए’ पेश किया। उसके बाद सप्तक महिला समूह ने गायन प्रस्तुत किया। समूह में शामिल महिला गायकों ने सबसे पहले राग मारवाह, तीन ताल में निबद्ध बंदिश ‘मधुर-मधुर बंधीया बजाय’ पेश किया। उसके बाद दादरा ‘डगर बीच कैसे चलूं’ प्रस्तुत किया।
समारोह की अगली प्रस्तुति दिल्ली से आई डॉ. दिव्या शर्मा तथा उनके समूह के नृत्य की रही। उन्होंने नृत्य की मनभावक प्रस्तुतियां दी। सबसे पहले प्रिंसेस पाणिग्रही ने ओडीसी में मंगलाचरण प्रस्तुत किया। उसके बाद लक्ष्मी सुब्रह्मण्यम के भारतनाट्यम नृत्य की रही। उन्होंने पुष्पांजलि की प्रस्तुति दी। उसके बाद अंगेश्री संजीवनाथ ने मोहिनी अट्टम के तत्वम् नृत्य की रही। देवेंद्र शर्मा ने कथक ‘तराना’ पेश किया। उसके बाद डॉ. दिव्या शर्मा के नेतृत्व में श्रीकृष्ण स्तुति के भावपूर्ण फ्यूजन नृत्य की प्रस्तुति हुई। इसी क्रम में डॉ. मधुमिता भट्टाचार्या ने गायन पेश किया। उन्होंने सबसे पहले राग बिहाग, बिलंबित लय, एक ताल में निबद्ध ‘कवन ढंग तोरा सजनी’ सहित कई प्रस्तुतियां दी। तबले पर पंकज राय, हारमोनियम पर पंकज शर्मा और तानपूरे पर सरिता आर्या ने संगत किया। अगली प्रस्तुति नीरज अमरनाथ मिश्रा का सितार वादन रहा। समारोह की निशा का समापन राहुल त्रिपाठी की पेशकश के साथ्थहुआ। समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान के प्रख्यात संगीत निर्देशक केसी मलु रहे। अतिथि का स्वागत आयोजन समिति के वरिष्ठ सदस्य हरिदास पारिख ने किया। कार्यक्रम का संचालन जगदीश्वर चौबे, घनश्याम से, ओजस्वी शर्मा, उत्कर्ष, उपेंद्र, नेहा आदि रहीं।