भगवान शिव की अनुकृति वाले भव्य मंच पर मंगलवार की रात रंग-रंगीलो राजस्थान की झलक रस-बस गई। राजस्थानी लोकगीत मांड की गूंज मची तो अग्नि भवई नृत्य, चरी नृत्य और कालबेलिया की थिरकन पर संगीत प्रेमी भाव विभोर हो उठे।
महाराजा मानसिंह को समर्पित इस संगीत निशा में राजस्थानी कलाकारों के अलावा स्थानीय प्रतिभाओं ने भी प्रस्तुतियां दीं। मुंबई से आई राजस्थानी लोकगीतों की गायिका रेखा राव ने- केसरिया बालम... की प्रस्तुति से सबको मुग्ध कर दिया।
इसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक लोकगीतों से समां बांध दिया। इनके बाद राजस्थान के लोक नर्तक पंकज मारवाड़ी ने अग्नि भवई नृत्य एवं चरी नृत्य की लुभा देने वाली प्रस्तुति की। पैरोडी गीत- सागर पानी भरवा जाम सा... पर उन्होंने सिर पर प्रज्ज्वलित दीपों वाले पांच घड़े लेकर नृत्य किया तो लोग चकित रह गए।
महिला कलाकारों ने चरी नृत्य की मोहक प्रस्तुति की। उनके साथ दर्शक भी झूमते रहे। फिर राजस्थान के कलाकारों ने सपेरों पर आधारित प्रसिद्ध कालबेलिया नृत्य की प्रस्तुति दी। रेखा राव के गीत -काल्यो कूद पड़े... पर बीन की धुन बजी और नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियां होने लगीं।
कालबेलिया नृत्य खुशी और मुनमुन ने प्रस्तुत किया। मुंबई से आए लोक गायक महेंद्र भट्ट ने भी सुरों का जादू बिखेरा।
इनके बाद अंजली गुप्ता ने राजस्थान के लोकगीत- रेशम का रूमाल... के बोल पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया।
इनके बाद मृदु मेहरोत्रा ने गीत- रंगीलो म्हारो ढोलना... पर नृत्य कर सबको झूमने पर विवश कर दिया। अंजली अग्रवाल ने गीत- म्हारी छन्न पछेली हाथा मा... की प्रस्तुति दी तो सुर ताल समूह की महिलाओं ने गीत- पल्लो लटके म्हारो पल्लो लटके.. की प्रस्तुति दी।
अंकिता, जयंती, रेखा, अंशिका, सोनल एवं सुनीता ने भी सुर लगाए। वाराणसी के गायक आशीष ने भी गीतों की प्रस्तुतियां दीं। मुख्य अतिथि उद्यमी केशव जालान ने कलाकारों को सम्मानित किया। संचालन जगदीश्वरी चौबे, अपूर्वा श्रीवास्तव, नेहा, ओजस्वी एवं सुकेशी ऋषभ ने संयुक्त रूप से किया।