काशी विश्वनाथ मंदिर में 1983 से नहीं हो रहा अधिनियम का पालन
काशी विद्वत परिषद के मंत्री डॉ. रामनारायण द्विवेदी का कहना है कि मंदिर की परंपराओं का संरक्षण होना चाहिए। प्राचीन काल से चली आ रही प्रथा परंपरा पर किसी भी तरह से कुठाराघात नहीं होना चाहिए। मंदिर अधिनियम के अध्ययन के बाद ही इस पर विचारपूर्वक कुछ कहा जाएगा।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी का कहना है कि मंदिर प्रबंधन के मामले में शासन की ओर से मंदिर के अधिनियम का पालन होना चाहिए। बाबा के मंदिर को स्थापित, निर्मित और सुरक्षित रखने वाले लिंगायत ब्राह्मणों के महंत परिवार को पूरी व्यवस्था से ही दरकिनार कर दिया गया है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंदिर प्रबंधन के मामले में प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया गया है।
डॉ. तिवारी का कहना है कि मंदिर के हर दिन के धार्मिक कार्यक्रम और प्रथा परंपरा से महंत परिवार को ही दूर कर दिया गया है। लिंगायत ब्राह्मण परिवार पिछले चार सौ सालों से काशी विश्वनाथ मंदिर की प्रथा, परंपरा और धार्मिक आयोजनों को निभाता आ रहा था। काशी विश्वनाथ मंदिर कानून 1983 लागू होने के पहले तक महंत परिवार पूरी व्यवस्था संभाल रहा था।
एक्ट के अनुसार अधिग्रहण के बाद प्रथा और परंपरा में हस्तक्षेप का अधिकार प्रशासन के पास नहीं है। बावजूद इसके शासन-प्रशासन लगातार परंपराओं को अपने हिसाब से बदलते रहे हैं। महंत परिवार की ओर से दायर याचिका में मंदिर का प्रबंधन उनके परिवार को सौंपने की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि मंदिर की स्थापना काल से लेकर अधिग्रहण तक महंत परिवार के पूर्वजों ने मंदिर की व्यवस्था और प्रथा परंपरा का निर्वहन करते रहे हैं।