वाराणसी। सुभासपा की ओर से रविवार को सारनाथ में सुहेलदेव जयंती समारोह मनाया गया। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय प्रमुख सचिव अरविन्द राजभर ने कहा कि राष्ट्रवीर सुहेलदेव ने देश की सुरक्षा के लिये अपने आपको कभी कमजोर सेना और छोटी सेना वाला राजा नहीं समझा। 40 किलो के तलवार से दुश्मनों का छक्का छुड़ाने वाले वीर रहे हम सब उन्हीं की संतान है। मुख्य वक्ता प्रदेश उपाध्यक्ष शशिप्रताप सिंह ने कहा कि 11 वी सदी के नायक रहे राजभर सुहेलदेव ने अपने राज्य में कभी किसी पर अन्याय नही होने दिया ।
उन्होंने कहा कि सभी को एक डोर में बांध कर अपनी राज्य की रक्षा की। जब भारत पर बाहर वालों ने आक्रमण किया औऱ भारत को लूटने का प्रयास किया। सबको उन्होंने मार भगाने का काम किया। लेकिन एक बार गजनवी का भांजा सलार मसूद गाजी 300000 सेना लेकर आक्रमण की तैयारी करने लगा। तब इस हिन्दू शासक राजा ने अन्य प्रान्त के राजाओं को एक जुट होकर युद्ध करने की बात कही। भारत के 17 राजाओं ने इनको अपना शीर्ष नेतृत्व मानकर मदद को तैयार हुए। फि र सलार मसूद गाजी को बहराइच में मार गिराया।
वहां राजा सुहेलदेव की जन्मस्थली बनाने का काम तो नहीं हुआ लेकिन सलार मसूद गाजी की दरगाह बनी है। सरकार से मांग की गई कि महाराजा सुहेलदेव का विशाल मंदिर बनना चाहिए। मांग की कि सुहेलदेव साथ राजभर जरूर जोड़ा जाय। कार्यक्रम की अध्यक्षता रमेश राजभर ने की। संचालन सिद्धार्थ राजभर और धन्यवाद ज्ञापन संतोष राजभर ने किया। इस मौके पर राजेश यादव, नित्यानंद पांडेय, विनोद सिंह टीटी, वंदना सिंह, शिवलाल यादव, ब्रजेश राय, राजेन्द्र पटेल, गुलाब पटेल आदि शामिल रहे।