बीएचयू हॉस्पिटल में कॉकलियर इम्पलांट (कृत्रिम कान) लगने के बाद जन्म से बधिर चार साल का मासूम चहक उठा। बीएचयू चिकित्सा विज्ञान संस्थान के नाक, कान और गला विभाग में मंगलवार को जन्म से बधिर बच्चे के कॉकलियर इंप्लांट का सफल ऑपरेशन किया गया।
चिप लगने के बाद मासूम की अब स्पीच थिरेपी होगी। इसके तहत जब बच्चा शब्दों को सुनने लगता है तब वह धीरे-धीरे बोलना सीख जाता है। कॉकलियर इंप्लांट सर्जन डॉ. राजेश विश्वकर्मा के निदेशन में डॉ. एसके अग्रवाल ने ऑपरेशन किया।
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि अमूमन लोग सुविधाओं के अभाव में जन्म के समय बहरेपन की जांच नहीं करा पाते हैं। इसकी वजह से बच्चे गूंगे और बहरे रह जाते हैं।
अक्सर इस तरह के आपरेशन के लिए लोगों को बड़े शहरों में जाना पड़ता था लेकिन अब आईएमएस बीएचयू में ही जन्म के समय बहरेपन की जांच, कॉकलियर इंप्लांट, स्पीच थिरेपी की सुविधा उपलब्ध है। डॉ. विश्वकर्मा ने बताया कि कॉकलियर इंप्लांट प्रोग्राम दो भागों में किया जाता है।
इसमें प्रथम कॉकलियर इंप्लांट की सर्जरी है और दूसरी रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम, जिसमें स्पीच थेरेपी, वौइस रेहाबिलिटिओं एवं ऑडियोलॉजी की पूरी टीम की जरूरत, मरीजों को छह महीने तक पड़ती है।