नेताजी सुभाष चंद्र बोस का काशी से गहरा नाता थे। नेताजी के मौसी और मौसा बंगाली ड्योढ़ी में रहते थे। उनके मौसा बैरिस्टर थे। नेताजी जी कई बार काशी की गुप्त यात्रा पर आए थे और काशी को लेकर उनके दिलो-दिमाग में कई योजनाएं थीं। बीएचयू के भारत कला भवन में नेताजी से जुड़ी कई स्मृतियां आज भी संग्रहीत हैं।
नेताजी के मौसी के प्रपौत्र वीरभद्र मित्रा ने बताया कि नेताजी का नारा था इत्तहाद, एकता, ऐतमाद, विश्वास, इतिमिदाद और बलिदान। उन्होंने गांधीजी को राष्ट्रपिता का संबोधन दिया था। वह बहुत दूरदर्शी थी थे एक पत्र में जिक्र मिलता है कि नेताजी ने गांधी जी से कहा था कि आप बंटवारे की बात मत मानिए नहीं तो आने वाले समय में इसी आधार पर सिखिस्तान, गढ़वालिस्तान की मांग उठने लगेगी।