हस्तलेख विशेषज्ञों की रिपोर्ट कहती है कि नेताजी और सारदानंद द्वारा लिखे गए पत्रों की लिखावट एक ही व्यक्ति की है। सारदानंद ब्रह्मचारी अपने गंगतोली, ओखीमठ प्रवास में डॉ. पाध्ये से चर्चा के दौरान कहा था कि मैं गंगोत्री से यात्रा करते हुए टेहरी आया, एक पेड़ की छाया में आराम कर रहा था। एक व्यक्ति से समाचार पत्र लेकर पढ़ने लगा।
शरत चंद्र बोस के दुखद निधन से मुझे धक्का लगा। मेरी दुनिया उजड़ गई। नेता जी के बड़े भाई शरत चंद्र बोस की मृत्यु 20 फ रवरी 950 को हुई थी। श्यामाचरण पांडेय ने कहा कि उनके चाचा राधाकांत पांडेय अंतिम समय तक सारदानंद के साथ रहे।
सुभाष के भ्रम में उनके भाई को पुलिस ने किया गिरफ्तार
गंगतोली ओखीमठ प्रवास में डॉ. सुरेश चन्द्र पाध्ये से चर्चा के दौरान सारदानंद जी ने कई रहस्य उद्घाटन किए थे। एक मई 1966 को चर्चा के दौरान डॉ. पाध्ये ने कहा कि लोग कहते हैं कि सुभाष के भ्रम में पुलिस ने उनके बड़े भाई शरत चन्द्र बोस को गिरफ्तार कर लिया था। इस पर सारदानंद जी ने स्पष्ट किया शरत बोस नहीं पूना में सुभाष के छोटे भाई शैलेश बोस को सुभाष समझ कर गिरफ्तार किया था बाद में उसको छोड़ दिया गया। सुभाष और शैलेश के चेहरे में बहुत समानता थी।
प्रधानमंत्री से मांग, रहस्य से उठाएं पर्दा
श्यामाचरण पांडेय ने पीएम नरेंद्र मोदी से मांग की है कि डॉ. सुरेश चंद्र पाध्ये सारदानंद उर्फ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ हमेशा सक्रिया रहे। उनके शोध कार्य से प्रमाणित हुआ है कि सारदानंद जी नेताजी बोस थे। इस रहस्य से अब पर्दा उठा देना चाहिए।