Varanasi News: भारत के असम में रहने वाली आधुनिक अहोम आबादी के बीच 6,12,240 ऑटोसोमल मार्करों का अनुवांशिक अध्ययन किया गया। इसके पहले लेखक डॉ. सचिन कुमार ने बताया कि इस अध्ययन से यह भी पता चला कि अहोम राजवंश थाईलैंड से अपने माइग्रेशन के बाद इस क्षेत्र में रहने वाली हिमालय के आबादी के साथ अनुवांशिक रूप से घुल मिल गए।
असम के ताई अहोम बारहवीं शताब्दी यानी करीब 800 साल पहले थाईलैंड से भारत आए थे। यहां उन्होंने अहोम राजवंश की न केवल स्थापना की, बल्कि हिमालय पर रहने वालों के साथ रहकर 600 साल तक शासन भी किया। बीएचयू विज्ञान संस्थान के जूलॉजी डिपार्टमेंट में हुए एक डीएनए अध्ययन में यह परिणाम सामने आया है। इसका प्रकाशन ह्यूमन मॉलिक्यूलर जेनेटिक्स जर्नल में हुआ है।
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बीएचयू में जीन विज्ञानी प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे और बीएसआईपी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नीरज राय ने अध्ययन में लखनऊ, बीएचयू, पुणे सहित अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों का भी सहयोग लिया। प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे का कहना है कि टीम में बीएचयू प्राचीन डीएनए लैब, बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेज, लखनऊ, मैंगलोर विश्वविद्यालय, डेक्कन कॉलेज, पुणे और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सात शोधकर्ता शामिल रहे।
भारत के असम में रहने वाली आधुनिक अहोम आबादी के बीच 6,12,240 ऑटोसोमल मार्करों का अनुवांशिक अध्ययन किया गया। इसके पहले लेखक डॉ. सचिन कुमार ने बताया कि इस अध्ययन से यह भी पता चला कि अहोम राजवंश थाईलैंड से अपने माइग्रेशन के बाद इस क्षेत्र में रहने वाली हिमालय के आबादी के साथ अनुवांशिक रूप से घुल मिल गए।
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प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे का कहना है कि अध्ययन से यह भी पता चला कि अहोम आबादी अनुवांशिक रूप से अपनी पैतृक मातृभूमि (थाईलैंड) से काफी हद तक अलग हो गई है। भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र पूरे एशिया में आधुनिक मनुष्यों के फैलाव का प्रवेश द्वार रहा है, और यह अध्ययन इस विचार का समर्थन करने वाले आनुवंशिक साक्ष्य को भी प्रस्तुत करता है। निष्कर्षों ने भारत के मानव जनसंख्या आनुवंशिकी और माइग्रेशन अध्ययन के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
लखनऊ में प्राचीन डीएनए प्रयोगशाला के प्रमुख डॉ. नीरज राय ने बताया कि हाई-रिजाल्यूशन हैप्लोटाइप-आधारित विश्लेषण ने इस अहोम आबादी को मुख्य रूप से नेपाल की कुसुंडा और मेघालय की खासी आबादी से अनुवांशिक समानता है।