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विद्यार्थियों की योग्यता का होगा सटीक आंकलन

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प्राइमरी स्कूलों में विद्यार्थियों की योग्यता का आंकलन और सटीक तरीके से होगा। साल में दो बार होने वाला सैट (स्टूडेंट एसेसमेंट टेस्ट) की कॉपी जांचने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया जाएगा। अभी तक सैट की ओएमआर शीट ब्लॉक स्तर पर शिक्षक ही जांचते हैं। लेकिन अब एप के जरिए इसका आंकलन होगा।
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स्कूलवार, ब्लॉकवार से लेकर राज्यवार ब्योरा एक क्लिक पर सामने होगा। जिले के सरकारी प्राइमरी व जूनियर स्कूलों में पढ़ने वाले 1.96 लाख विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा। इस एप को सबसे पहले प्रयोग के तौर पर गुजरात में लागू किया गया था, जिसके अब यूपी के परिषदीय स्कूलों में भी शैक्षिक सत्र शुरू होने के साथ लागू किया जाएगा।
सैट पिछले वर्ष दो बार करवाया गया। इसमें ओएमआर शीट पर बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर दिए जाते हैं। लेकिन अभी शिक्षक ही इसे जांचते हैं और जांचने के दौरान मानवीय गलतियों की संभावना बनी रहती है। अब इसमें एआई का इस्तेमाल कर इसे और सटीक बनाया जाएगा।
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तय किये गए न्यूनतम लर्निंग आउटकम
प्रदेश सरकार ने कक्षावार विद्यार्थियों के न्यूनतम लर्निंग आउटकम को तय कर दिया है। यानी कक्षा एक या दो में पढ़ रहे बच्चों को हिंदी, गणित या अंग्रेजी में न्यूनतम क्या क्या आना ही चाहिए। इसके लिए कक्षावार प्रेरणा सूची जारी की गई है।
सैट परीक्षाओं के जरिये सालभर में बच्चों का दो बार लर्निंग आउटकम परखा जाता है। अब सैट की कॉपी जांचने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए सरल एप की मदद ली जाएगी। - राकेश सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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