वाराणसी। पेशावर के स्कूल में आतंकी हमले में छात्रों के मारे जाने का दर्द गंगा के पार रेती पर उभरा आया। सोमवार को कलाकारों ने धूप के बावजूद हवा के चलते हो रही सिहरन को धता बताते हुए दिन भर रेत से आकृतियां गढ़ने मे जुटे रहे और शाम को सारा टीला ही कलाकृतियों से भर गया।
कला गुरु रामछाट पार की जयंती पर आयोजित ‘रेत में आकृति की खोज’ प्रतियोगिता के समापन पर बेहतरीन प्रतिमाएं गढ़ने वाले 22 कलाकारों को सम्मानित किया गया और 10 छात्रों को पुरस्कृत किया गया।
अबकी रविदास घाट के सामने गंगा पार रेत का टापू उभरा है। काशी के वार्षिक कला कार्यक्रमों शुमार राम छाटपार शिल्पन्यास के ‘रेत में आकृति की खोज’ में प्रतिभाग करने के लिए सुबह से नावों से कलाकार इस टीले पर पहुंचने लगे। काशी हिंदू विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, इंस्टीट्यूट आफ फाइन आर्ट, धीरेंद्र महिला पीजी कालेज, के एनपीजी कालेज ज्ञानपुर, पटना आर्ट कालेज पटना, दिल्ली यूनिवर्सिटी, इलाहाबाद, गोरखपुर, आजमगढ़, लखनऊ, इलाहाबाद से आर्टिस्ट और कला संकायों के छात्रों ने जगह घेर कर अपनी कृतियां बनानी शुरू कर दीं।
ऐसा नहीं कि यहां पहुंचे सभी सैंड आर्टिस्ट ही हों। शौकिया कृतियां गढ़ने वालों की संख्या दक्ष कलाकारों से ज्यादा ही थी। कुल 450 से ज्यादा कलाकारों ने गंगा प्रदूषण, एयर एशिया का विमान दुघर्टना, पेरिस और पेशावर स्कूल में बच्चों पर हमला, स्वच्छता अभियान, परिवर्तनशील काशी, नारी उत्पीड़न, कन्या भ्रूण हत्या जैसे विषयों पर कलाकृतियां बनाईं। कुछ शिल्पों में महामना और अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न देने की बात भी दर्शाई गई थी।
कुल 80 से ज्यादा कृतियां बनीं। दोपहर बाद उनकी कृतियों को देखने शहर के कलाप्रेमी उमड़ पड़े। कथाकार डॉ. काशीनाथ सिंह, प्रो. बलराज पांडेय, डॉ. श्रीप्रकाश शुक्ल, प्रो. प्रदोष मिश्रा सहित तमाम साहित्यकार शिल्पों को देखने पहुंचे। जापान की संयोजक मदन लाल, केईको हयासी, संजय सिंह, गौरव कुमार दूबे ने आगंतुकों को सम्मानित किया।