लंबे समय से कैंसर से जूझ रही बीएचयू हिंदी विभाग की प्रोफेसर संघमित्रा का बुधवार को निधन हो गया। उनके निधन पर गुरु शिष्य परपंरा का नायाब उदाहरण पेश करते हुए उनके शिष्य अनुज ने हरिश्चंद्र घाट पर हुई अंत्येष्टि में उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान बीएचयू से जुड़े कुछ शिक्षक और छात्र भी मौजूद रहे।
प्रोफ़ेसर संघमित्रा का 7 मई यानी बृहस्पतिवार को ही जन्मदिन था और उन्होंने जन्मदिन से ठीक 1 दिन पहले अपने आखिरी सांस ली। मूल रूप से आगरा निवासी संघमित्रा जोधपुर कॉलोनी स्थित आवास में रहती थी। वर्ष 1998 में ही बीएचयू में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में उनकी नियुक्ति हुई थी।
साल 2013 से वह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रही थीं। उनका छात्र अनुज ही छोटा भाई बनकर उनकी सेवा करता था। मृत्यु के बाद इसी छोटे भाई रूपी छात्र ने बेटे का फर्ज निभाते हुए प्रोफेसर संघमित्रा को मुखाग्नि दी। बताया जा रहा है कि कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण उनके कुछ रिश्तेदार नहीं आ सके।