छात्र हॉस्टल आए तो लेकिन उनके चेहरे पर पुलिस की पिटाई का दर्द झलक रहा था। कहा कि जिन छात्रों को पुलिस बाहरी कहकर ले गई वह विश्वविद्यालय के ही छात्र थे, उनके पास परिचय पत्र भी था। अगर हॉस्टल में बाहरी छात्र रह रहे हैं तो विश्वविद्यालय प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए, उनका कहना है कि कुछ लोगों की वजह से सभी की पुलिस ने पिटाई की। यहां तक कि दिव्यांग छात्रों को भी नहीं छोड़ा।
बीएचयू प्रशासन चाहता तो नहीं बिगड़ता माहौल
कमरों में आए छात्रों का कहना है कि प्रॉक्टोरियल बोर्ड की भारी भरकम फौज के बाद पुलिस हॉस्टल में क्यों घुसी और पिटाई की यह समझ से परे हैं। जिस समय पुलिस कमरों को खुलवाकर पिटाई कर रही थी, उस समय किसी ने रोकने का प्रयास नहीं किया। पुलिस को परिचय पत्र चेक कर ही कोई कार्रवाई करनी चाहिए।
बोले छात्र- हॉस्टल में कैसे घुसी पुलिस, समझ से परे
विश्वविद्यालय की सुरक्षा के लिए प्रॉक्टोरियल बोर्ड पर्याप्त है। पुलिस की कोई जरूरत नही। हॉस्टल में घुसकर पुलिस ने पिटाई की, इस वजह से हाथ टूट गया, सर में भी चोट आई। अब परीक्षा कैसे देंगे समझ में नहीं आ रहा है। जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।-विद्यासागर सिंह
बीस नवंबर से परीक्षा है और हॉस्टल बंद कर दिया गया। तीन दिन तक लंका गेट पर धरना देने के दौरान भी तैयारी चलती रही। बीएचयू प्रशासन घटना के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है। छोटी-छोटी सी बात के लिए पुलिस को कैंपस में बुलाना पड़ रहा है, इस पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड को सोचना होगा।-हिमांशु पांडेय
परीक्षा के समय हॉस्टल बंद करने का फैसला गलत है। जिस तरह से पुलिस ने घुसकर पिटाई की लगता है कि कहीं और का गुस्सा पुलिस ने छात्रों पर उतारा। जो छात्र पढ़ रहे थे, उनकी भी जमकर पिटाई की गई। इसकी अनुमति बीएचयू प्रशासन ने कैसे दी यह समझ से परे हैं। परीक्षा की तैयारी की चिंता है।-शुभम कुमार