वाराणसी। उत्तर भारत के ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें अब नारियल के छिलकों के रेशे से तैयार विशेष फैब्रिक कयर जियो टेक्सटाइल से मजबूत बनेंगी। कयर बोर्ड ने नारियल के छिलकों के रेशे से सड़क बनाने की तैयारियां भी शुरू कर दी है। बनारस में ही कयर बैंक भी स्थापित किया जाएगा। इंडियन रोड्स कांग्रेस ने भी ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों के निर्माण के लिए कयर जियो टेक्सटाइल को मान्यता प्रदान कर दी है।
उत्तर भारत में सूक्ष्म और लघु उद्यम मंत्रालय के तहत आने वाले कयर बोर्ड की योजना के केंद्र में बनारस को ही रखा गया है। बनारस में बनने वाले कयर बैंक में नारियल के छिलके में मौजूद रेशे से जियो टेक्सटाइल समेत अन्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे। सेंट्रल कयर रिसर्च इंस्टीट्यूट, केरल और इंडियन जूट इंडस्ट्रीज रिसर्च एसोसिएशन, कोलकाता के पूर्व निदेशक डॉ. यूएस शर्मा का कहना है कि कयर-जियो टेक्सटाइल से केरल व तमिलनाडु में कई सड़कें बनी हैैं। इस तकनीक से सड़क बनाने की लागत में 15 प्रतिशत तक कमी और सड़क की उम्र भी दस साल बढ़ जाती है। बार-बार सड़क बनाने से छुटकारा मिलने से सड़कों की ऊंचाई बहुत नहीं बढ़ती। जियो टेक्सटाइल का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके प्रयोग के बाद सड़क धंसती नहीं हैै। केंद्र सरकार ने 2020 में ही सड़कों के सुधार के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तीसरे चरण में ग्रामीण इलाकों में कयर जियो टेक्सटाइल के प्रयोग की स्वीकृति दे दी थी। इस तकनीक का सबसे पहले इस्तेमाल फ्री ट्रायल के रूप में केरल के कोन्नी स्थित राजीव गांधी इंडोर स्टेडियम में किया गया। केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण में कयर-जियो टेक्सटाइल का सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया है। कयर बोर्ड के सीनियर जोनल डायरेक्टर जेके शुक्ल ने बताया कि कयर बैंक बनाने के लिए एमएसएमई मंत्रालय को प्रस्ताव दिया गया है।
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क्वायर-जियो टेक्सटाइल
कयर को धरती का सबसे मजबूत रेशा माना जाता है। कयर-जियो टेक्सटाइल एक प्राकृतिक पारगम्य फैब्रिक है, जो बेहद मजबूत होने के साथ अत्यधिक टिकाऊ, टूट-फूट, मोड़ एवं नमी प्रतिरोधी है। इस कारण इसका उपयोग नदी तटबंधों, खादान की ढलानों का स्थिरीकरण करने और मिट्टी के कटाव को रोकने में भी किया जा सकता है।