केंद्र सरकार की बैंकिंग उद्योग से संबंधित नीतियों के विरोध में शुक्रवार को देशव्यापी हड़ताल के चलते वाराणसी में भी सभी बैंक बंद रहे। 18 बैंकों के नौ कर्मचारी संगठनों से जुड़े तीन हजार से अधिक कर्मचारी बैंकिंग कार्य से विरत रहे। कर्मचारियों ने बैंक के बाहर धरना दिया और सभा कर केंद्र सरकार की बैंकिंग नीति की जमकर आलोचना की। एक दिन की हड़ताल के चलते अकेले वाराणसी में लगभग 300 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ।
ऑल इंडिया यूनियन बैंक ऑफिसर फेडरेशन के बैनर तले यूनियन बैंक के आंचलिक कार्यालय (सेंट्रल जेल रोड) पर हुई सभा में बैंक कर्मचारियों ने कहा कि यह हड़ताल सार्वजनिक क्षेत्र को सुनियोजित ढंग से कॉरपोरेट घरानों को सौंपने की साजिश को उजागर करने के लिए है। यूनियन बैंक ऑफिसर एसोसिएशन की पूर्वी यूपी इकाई के उपसचिव जेबी सिंह ने कहा कि ऐसी ही नीतियों के चलते बीएसएनएल, एमटीएनल एवं अनेक स्टेट इलेक्ट्रिकल बोर्ड आदि पहले से ही संकट में हैं।
उधर, भारतीय स्टेट बैंक के कर्मचारियों ने भी बैंक विरोधी नीतियों, कामगार विरोधी श्रम सुधारों, बैंकों के निजीकरण व विलय के विरोध में कचहरी स्थित आंचलिक कार्यालय पर धरना दिया और सभा कर केंद्र सरकार के खिलाफ गुस्सा निकाला। एसबीआई कर्मचारी संघ के उपमहामंत्री राजू राय, केके चौबे, शैलेंद्र कुमार, एके सिंह, विनोद शंकर सिंह, विनोद मिश्र, पीएस वेंकटरमन, अशोक सिंह, मनोज सिंह, रामविशुन चौबे, संजय शर्मा व विजय सहगल आदि शामिल थे
इसी क्रम में बैंक आफ बड़ौदा के सभी अधिकारी और कर्मचारी भी हड़ताल पर रहे। चांदपुर स्थित बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय पर हुई सभा में वक्ताओं ने जनविरोधी बैंकिंग सुधारों की खिलाफ त की। धरना व सभा में राघवेंद्र चतुर्वेदी, गौरव चतुर्वेदी, गजेंद्र कुमार, रोहित नंदन, लालचंद, राजकुमार, जेके दास, अभिषेक पाल, संजीव सिंह, रविशंकर, अक्षय, जेके वर्मा, आरके जैन, संजय कुमार, शिवनारायण आदि शामिल थे।