बीएचयू संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय से आचार्य में चांसलर मेडल प्राप्त करने वाले दीपक कुमार उपाध्याय ने मुफलिसी के दिन भी देखे हैं। एक वक्त था जब उनके पास बीएचयू में प्रवेश के लिए फीस के पैसे नहीं थे। दीपक ने लोगों के घरों में नवरात्र में पाठ करना शुरू किया। जो पैसे मिलते उससे फीस भरते थे। 12 साल की उम्र में घर छोड़कर पढ़ाई के लिए अंबेडकरनगर से वाराणसी आ गए थे।
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। ये कहानी उन युवाओं पर सटीक बैठती है, जिन्होंने संघर्ष की दीवारों को लांघकर खुद अपना रास्ता बनाया। राष्ट्रीय युवा दिवस आज ऐसे ही युवाओं से रूबरू करा रहे हैं।
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दूसरों के घरों में पाठ कर पूरी की पढ़ाई
बीएचयू संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय से आचार्य में चांसलर मेडल प्राप्त करने वाले दीपक कुमार उपाध्याय ने मुफलिसी के दिन भी देखे हैं। एक वक्त था जब उनके पास बीएचयू में प्रवेश के लिए फीस के पैसे नहीं थे। दीपक ने लोगों के घरों में नवरात्र में पाठ करना शुरू किया। जो पैसे मिलते उससे फीस भरते थे। 12 साल की उम्र में घर छोड़कर पढ़ाई के लिए अंबेडकरनगर से वाराणसी आ गए थे। रणवीर संस्कृत विद्यालय में प्रवेश लिया। किसान माता-पिता के सपनों को पूरा करने के लिए दीपक ने पूरी मेहनत और लगन से पढ़ाई की। 2010 में दसवीं में टॉप किया। बारहवीं के बाद दीपक ने बीएचयू से स्नातक की पढ़ाई की। परिवार की मदद के लिए दीपक आज भी घरों में पाठ करते हैं। उन्होंने परास्नातक की पढ़ाई पूरी की और चांसलर मेडल प्राप्त कर माता-पिता का नाम रोशन कर चुके हैं।
अनीता यादव
- फोटो : अमर उजाला
ट्रक ड्राइवर की बेटी बनेगी डॉक्टर
प्रतिभा किसी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती। इस कहावत को पिड़रा के रमईपट्टी की बेटी ने सच कर दिखाया है। 20 साल की अनीता यादव ने तमाम परेशानियों के बावजूद नीट यूजी की परीक्षा पास की है। अनीता के पिता ट्रक ड्राइवर हैं और मां गृहिणी हैं। परिवार ने बिटिया के हौसले को कभी कम नहीं होने दिया। अनीता परिवार में पहली डॉॅक्टर बनने जा रही हैं। प्राथमिक विद्यालय रमईपट्टी से पढ़ाई के बाद अनीता ने नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की। दसवीं के बाद अनीता का दाखिला सेंट्रल हिंदू गर्ल्स स्कूल में हो गया। आर्थिक तंगी और कोविड 19 के बीच अनीता की प्रतिभा को देख निजी कोचिंग सेंटर ने निशुल्क तैयारी कराने का फैसला लिया। लगन और मेहनत की बदौलत अनीता ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की। वह मिर्जापुर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रही हैं।
उद्यमी राजेश जायसवाल
- फोटो : अमर उजाला
खुद बने व्यवसायी, दूसरों को भी दिया रोजगार
सरकारी योजना का लाभ उठाकर उद्यमी राजेश जायसवाल युवाओं के लिए नजीर पेश कर रहे हैं। कोरोना काल में शुरू की गई हस्तनिर्मित रेडीमेड कपड़ों की फैक्ट्री बड़े व्यवसाय में तब्दील हो चुका है। नव उद्यमी ने करीब 100 को रोजगार भी उपलब्ध कराया। इनके बनाए कपड़े बाजार के साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी बेचे जा रहे हैं। लंका निवासी राजेश पांडेयपुर अपनी रेडिमेड गारमेंट्स की फैक्ट्री चलाते हैं। एमकॉम के बाद उन्होंने स्वरोजगार के बारे में सोचा। जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र को अपने प्रोजेक्ट के बारे में समझाया। केंद्र ने उनके प्रोजेक्ट की सराहना कर सहयोग किया। राजेश का लगभग 40 महिलाओं व 60 पुरुषों के सहयोग से एक करोड़ का टर्न ओवर है।
नहीं टूटने दिया हौसला
काशी के टीवी कलाकार हर्ष राय की कहानी युवाओं को प्रेरित करने वाली है। टीवी जगत में आने से पहले की यात्रा संघर्ष से भरी रही। 2010 में मिस्टर ईस्टर्न यूपी का ताज जीत चुके हर्ष ने परिवार की जिम्मेदारियों को देख फिल्मी दुनिया में जाने का सपना छोड़ दिया था। गैंग्स ऑफ वासेपुर की शूटिंग के दौरान जब उनकी मुलाकात अनुराग कश्यप से हुई तो उनके मन में दोबारा फिल्मों में जाने की इच्छा जागी। पहली बार मुंबई पहुंचे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि अनजान शहर में उन्हें ठोकरें खानी पड़ेगी। एक महीने तक हर्ष ने न जाने कितने प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के चक्कर काटे, लेकिन सब जगहों से निराशा ही हाथ लगी। ऐसे में एक बार फिर हर्ष का हौसला टूटने लगा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पहला ब्रेक बालाजी की ओर से मिला। जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। जी टीवी व बालाजी के बड़े सीरियल में हर्ष को लीड रोल मिला। हर्ष ने कुमकुम भाग्य, मेरी आशिकी तुमसे ही, ढाई किलो प्रेम, साड्डा हक सहित कई सीरियल में काम किया।