एसटीएफ के अनुसार पूछताछ में सामने आया कि इनका एक संगठित गिरोह है और यह वर्ष 2019 से सक्रिय हैं। गिरोह के सदस्य इंटरनेट पर सरकारी नौकरी की वेबसाइट चेक किया करते हैं। सरगना निलेश ने पूछताछ के दौरान यह बताया कि पिछले दो-तीन वर्ष से नौकरी का लालच देकर बेरोजगार युवक, युवतियों को फंसाकर विभिन्न विभागों के कूटरचित जाली नियुक्ति पत्र बनाकर देता था, इस कार्य के एवज में उनके अभिभावकों से सात-सात लाख रुपये वसूलते थे।
निलेश ने बताया कि इस खेल में मेरे साथ अन्य कई और लोग भी शामिल हैं। इस क्षेत्र में मेरे साथ अजय और प्रदीप नौकरी दिलाने के नाम पर युवकों और युवतियों के अभिभावकों से अपने मोबाइल फोन से मेरी बात कराते थे। इसके बाद जिनका पैसा मिलता था, उनके कूटरचित नियुक्ति पत्र पोस्ट आफिस या स्वंय व अपने झारखंड के सहयोगियों बलिया के सिकंदरपुर निवासी चन्द्रभूषण यादव और महतो के माध्यम से फर्जी नियुक्ति पत्र व पुलिस वेरिफिकेशन के कागजात डाक से उनके पते पर भेजते थे।
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एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार सरगना निलेश द्वारा युवक- युवतियों के अभिभावकों से कहा जाता था कि थाने पर जाकर भेजे गये वेरिफिकेशन पत्र को सत्यापित कराकर भेज दो। इस पर उन्हे विश्वास हो जाता था कि मेरी नौकरी लग गई है। इसी प्रकार निलेश और उसके सहयोगियों ने कई लोगों को ठगा।
पूछताछ में इन लोगों द्वारा यह भी बताया गया कि ठगी से लगभग 60-70 लाख रुपये प्राप्त हुआ। इस ठगी से प्राप्त अधिकांश धन का निवेश कपडे़ की दुकान व हारवेस्टर मशीन और ज्वेलरी की खरीदारी में किया। एसटीएफ अब इनके अन्य साथियों के बारे में जानकारियां जुटा रही है।