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दो दिन तक निगरानी के बाद एसटीएफ को मिली सफलता

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शाहगंज में प्रतिबंधित कफ़ सीरप मामले में गिरफ्तार आरोपी। - फोटो : JAUNPUR
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शाहगंज। प्रतिबंधित कफ सिरप की तस्करी का धंधा यहां पिछले आठ महीने से चल रहा था। इसकी भनक न तो आसपास के लोगों को थी और न ही मकान मालिक को। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो लखनऊ व एसटीएफ वाराणसी की टीम ने सटीक मुखबिरी के बाद दो दिनों तक निगरानी की, तब उसे यह सफलता हासिल हुई।
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टीम को कई दिनों से इस अवैध धंधे की सूचना मिल रही थी। इसके लिए शनिवार से ही क्षेत्र में जाल बिछाना शुरू किया। रविवार को एक ट्रक का लोकेशन मिला। इसी आधार पर टीम ने अपना काम शुरू किया। टीम रविवार की शाम सात बजे से ही ट्रक के पीछे लगी। सवा दस बजे चावल लादकर ट्रक ट्रांसपोर्ट के गोदाम पर पहुंचा। संयुक्त टीम ट्रक चालक और गोदाम पर मौजूद लोगों की निगरानी में जुट गई। इसी बीच दूसरा ट्रक भी पहुंचा जो गोदाम के दूसरी दिशा में खड़ा हुआ। पहले ट्रक से चावल की बोरियों को निकालकर बीच में प्रतिबंधित सीरप रखा गया। उसके बाद आगे चावल की बोरियों की छल्ली लगा दी गई। इसी तरह दूसरे ट्रक में रखी प्लाई के बीच में सिरप रखा गया। ट्रक अपने गंतव्य को रवाना होने की तैयारी ही कर रहे था कि टीम ने दोनों ट्रकों सहित गोदाम और वहां पर मौजूद लोगों की घेरेबंदी कर पकड़ लिया। रात साढ़े दस बजे से सोमवार की देर शाम तक टीम कार्रवाई में जुटी रही। गोदाम के ऊपरी तल पर रह रहे किरायदारों व आसपास के रहवासियों की माने तो बीते आठ महीने से यहां काम चलता रहा। रोजाना तीन से चार ट्रकों पर दवा की लोडिंग होती थी, लेकिन ट्रांसपोर्ट के नाम पर किसी को शक नहीं हो सका।
उत्तराखंड से तस्करी कर लाया गया था सिरप
शाहगंज से गिरफ्तार तस्करों ने पूछताछ में कई अहम जानकारियां दी है। एसटीएफ इंस्पेक्टर अनिल सिंह ने बताया कि बरामद कफ सिरप को गिरोह के सरगना अवनीश सिंह उर्फ छोटू, मतलूब और संतोष तिवारी पश्चिमी यूपी व उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से तस्करी के माध्यम से मंगाकर शाहगंज में भंडारित कराया था। गिरफ्तार चंदन गुप्ता स्थानीय स्तर पर सारी व्यवस्था देखता है। यहां से सीरप चावल की बोरियों के बीच छिपाकर पश्चिम बंगाल के मालदा भेजा जा रहा था। वहां पहुंचने के बाद अवनीश सिंह उर्फ छोटू, मतलूब एवं संतोष तिवारी इसे आगे ले जाने की व्यवस्था करते।
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कोडिन के कारण अधिक सेवन से होता है नशा
फेंसेडिल सिरप को खांसी की दवा के रूप में उपयोग किया जाता रहा है। इसमें कोडिन नामक केमिकल पाया जाता है, जिसे एक साथ अधिक मात्रा में लेने पर नशा होता है। बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में नशा करने वाले लोग इसका प्रयोग नशीले पदार्थ के रूप में करते हैं। वहां यह सिरप ऊंचे दामों पर बिकता है।
मोहरे नहीं, खिलाड़ी को पकड़ें
जौनपुर। केमिस्ट एंड कॉस्मेटिक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र गुप्ता ने शाहगंज में हुई कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी। कहा कि विभाग मोहरों की बजाय असल खिलाड़ियों को पकड़े, तभी इस पर प्रभावी अंकुश लगेगा। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से नकली दवाओं का धंधा जिले में धड़ल्ले से चल रहा है। जब कभी विभाग कुछ लोग पकड़ता है तो उनका लाइसेंस निरस्त कर देता है। बाद में गुपचुप तरीके से लाइसेंस बहाल कर दिया जाता है। इतनी बड़ी मात्रा में हुई बरामदगी से साबित हो रहा है कि इसके पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है। पिछले दिनों इसी प्रतिबंधित कफ सिरप के मामले को लेकर जिला मुख्यालय की पांच से ज्यादा थोक विक्रेताओं के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए थे, जिनको बाद में धीरे से बहाल कर दिया गया। इन्हीं दवा विक्रेताओं को थोक दवा बिक्री के लिए नए लाइसेंस भी जारी कर दिए गए।
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