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UP News: बनारस में खुलेगा प्रदेश का पहला फाइलेरिया निवारण केंद्र, 20 प्रशिक्षुओं का केरल में प्रशिक्षण शुरू

Sun, 15 Jan 2023 06:25 PM IST
वाराणसी ब्यूरो आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी

सार

उत्तर प्रदेश के पहले फाइलेरिया निवारण केंद्र की शुरुआत बनारस में होगी। बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन और प्रदेश सरकार के सहयोग से राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में केंद्र खुलेगा। 
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फाइलेरिया
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विस्तार
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प्रदेश के पहले फाइलेरिया निवारण केंद्र की शुरुआत बनारस में होगी। बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन और प्रदेश सरकार के सहयोग से राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में केंद्र खुलेगा। केरल का इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड डर्मेटोलॉजी (आईएडी) भी मरीजों के इलाज में मदद करेगा।

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राजकीय आयुर्वेद में केंद्र फरवरी से शुरू हो जाएगा। आईएडी के निदेशक एसआर नरहरि ने इस प्रोजेक्ट में अपनी रुचि दिखाई है। महाविद्यालय की ओर से नौ प्रशिक्षुओं को विशेष प्रशिक्षण के लिए केरल भेजा गया है। फाइलेरिया के गंभीर मरीजों का राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के द्वितीय तल पर खुलने वाले केंद्र में इलाज किया जाएगा।

सीएम योगी आदित्यनाथ के हाथों होगी शुरुआत

आईएडी की ओर से राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में इस केंद्र को सेंटर आफ एक्सीलेंस के तौर पर विकसित करने की योजना है। प्राचार्य प्रो. नीलम गुप्ता ने बताया कि बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने फाइलेरिया उन्मूलन के लिए प्रदेश सरकार से समझौता किया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के हाथों इसकी शुरुआत होगी। इस चिकित्सा पद्धति से इलाज में फाइलेरिया के मरीजों की 60 से 70 फीसदी स्वस्थ होने की संभावनाएं हैं।

फाइलेरिया निवारण केंद्र में ऐसे होगा इलाज

  • इंटीग्रेटेड मेडिसिन ट्रीटमेंट फार लिंफेडेमा एंड फाइलेरिया
  • एलोपैथिक डर्मोटोलॉजी सर्विस
  • आयुर्वेद के आहार और विहार के अनुसार चिकित्सा और योग
  • टीम में एलोपैथिक, डर्मेटोलाजिस्ट, लिम्फोलॉजिस्ट, फिजिशियन, आयुर्वेद चिकित्सक, योग विशेषज्ञ, होम्योपैथिक चिकित्सक, डाइट एंड न्युट्रिशियन, नर्स, थेरेपिस्ट, इंजीनियर और आईटी एक्सपर्ट शामिल रहेंगे।
 
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लाइलाज है फाइलेरिया

फाइलेरिया की बीमारी का अभी तक दुनिया में पूरी तरह से कोई इलाज नहीं है। यह निमेटोड कीड़े और मच्छरों के जरिये इंसान के शरीर में प्रवेश करता है। भारत में इसे हाथी पांव के नाम से जाना जाता है। फाइलेरिया तीन तरह का होता है। इसमें लिम्फेटिक फाइलेरिया, सबक्यूटेनियस फायलेरियासिस और सीरस कैविटी फाइलेरिया है।
  • 2018 में 995 मरीज मिले थे
  • 2019 में 1097 मरीज मिले थे
  • 2020 में 1073 मरीज मिले थे
  • 2021 में 1202 मरीज मिले थे
  • 2022 में 327 मरीज मिले (नहीं हुआ सर्वे)
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