फाइलेरिया की बीमारी का अभी तक दुनिया में पूरी तरह से कोई इलाज नहीं है। यह निमेटोड कीड़े और मच्छरों के जरिये इंसान के शरीर में प्रवेश करता है। भारत में इसे हाथी पांव के नाम से जाना जाता है। फाइलेरिया तीन तरह का होता है। इसमें लिम्फेटिक फाइलेरिया, सबक्यूटेनियस फायलेरियासिस और सीरस कैविटी फाइलेरिया है।
- 2018 में 995 मरीज मिले थे
- 2019 में 1097 मरीज मिले थे
- 2020 में 1073 मरीज मिले थे
- 2021 में 1202 मरीज मिले थे
- 2022 में 327 मरीज मिले (नहीं हुआ सर्वे)