वाराणसी। बनारस से हर साल अरबों के रुपये के ग्लास बीड्स (कांच के मोती) दुनिया भर में निर्यात किये जाते हैं। चीन से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलने के बाद बनारस का यह कुटीर उद्योग बर्बाद न हो जाय इसके लिए राज्य सरकार यहां ग्लास बीड्स क्लस्टर बनाने जा रही है। यहां इस कारोबार से जुड़े उद्यमियों को एक जरूरी तकनीकी सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी। यह जानकारी प्रदेश के लघु उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भगवत सरन गंगवार ने शुक्रवार को सर्किट हाउस में दी। उन्होंने बताया कि चांदपुर में इस क्लस्टर को बनाने में 14 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं, इतनी ही लागत से लोहता में सिल्क बुनाई केंद्र भी बनाया जाएगा।
शहर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए शुक्रवार को वाराणसी पहुंचे राज्यमंत्री ने सर्किट हाउस में मीडिया से कहा कि प्रदेश सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए तत्पर है। रामनगर इंडस्ट्रियल इस्टेट में 11 करोड़ रुपये की लागत से साडि़यों की डिजाइनिंग के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने हाल ही में भदोही में 150 करोड़ रुपये की लागत से कार्पेट एक्सपो पार्क
बनवाने की घोषणा की थी जिस पर काम भी शुरू हो चुका है। देश-विदेश से खरीददार आसानी से कालीन बेल्ट में पहुंच सकें इसके लिए बाबतपुर हवाई अड्डे से भदोही तक के मार्ग को भी फोरलेन किया जा रहा है। इसके अलावा 7.5 करोड़ रुपये की लागत से भदोही में कार्पेट बैकिंग प्लांट बनाया जा रहा है। इसकी मदद से कालीन के पीछे आसानी से अस्तर लगाए जा सकेंगे और ये कालीन को पीछे
की तरफ से खराब होने से बचाएंगे। वहीं इस तकनीकी के इस्तेमाल से पेस्टिंग के चलते कालीन में जो बदबू आती है, उससे निजात मिलेगी और कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। भदोही में ही 8.5 करोड़ रुपये की लागत से माडर्न डाइंग हाउस का भी निर्माण कराया जा रहा है ताकि कच्चे उत्पादों की डाई करने में आसानी हो। प्रदेश की नई हस्तशिल्प नीति तैयार हो गई है, जिसका शासनादेश जल्द ही जारी किया जाएगा। इसके बाद से हस्त शिल्पियों कई तरह की सुविधाएं मिलने लगेंगी।